- उपायुक्त की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन व स्वच्छ भारत मिशन योजनाओं की गहन समीक्षा
- “‘यहाँ कोई दोस्त नहीं होता…’ से ‘पूरी इंडस्ट्री साथ है’ तक: तिहाड़ जेल से रिहाई की ओर राजपाल यादव, सलमान–अजय बने संबल”
- पूर्वी सिंहभूम के 40 प्रगतिशील किसान उन्नत उद्यानिकी प्रशिक्षण के लिए नोएडा रवाना, उपायुक्त ने दिखाई हरी झंडी
- नगर निकाय चुनाव से पहले अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई, धातकीडीह में 440 लीटर चुलाई शराब व 20 लीटर स्पिरिट जब्त
- उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में राजस्व व भू-अर्जन मामलों की समीक्षा, सभी विभागों को 100% लक्ष्य प्राप्ति का निर्देश
- हमीरपुर: जिलाधिकारी ने जनसुनवाई में सुनीं 91 शिकायतें, अधिकांश का मौके पर निस्तारण
- हमीरपुर :जिलाधिकारी द्वारा थाना कुरारा का वार्षिक निरीक्षण संपन्न
- आँसुओं से उम्मीद तक: राजपाल यादव के साथ खड़ा हुआ देश, सोनू सूद के बाद राव इंदरजीत सिंह यादव ने दी ₹1.11 करोड़ की बड़ी मदद
- खंडवा- खंडवा जिले के पंधाना ब्लॉक में स्कूलों के लिए बर्तनों की खरीदी को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक वायरल संदेश में शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों और स्थानीय दुकानदारों की मिलीभगत से अधिक कीमत के बिल तैयार करने और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल संदेश ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हैं वायरल संदेश में लगाए गए आरोप? सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेश के अनुसार— स्कूलों में उपयोग के लिए खरीदे गए बर्तनों की कीमत से अधिक राशि के बिल बनाए गए। स्वयं सहायता समूहों को निर्धारित राशि से अधिक भुगतान करना पड़ा। कुछ समूहों के खातों में कथित रूप से कम राशि जमा हुई। कुछ समूहों के खातों में भुगतान जमा ही नहीं हुआ। कुछ समूहों से दो हजार रुपये की मांग की जा रही है, जिसे कथित रूप से अधिकारियों को देने की बात कही गई है। संदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से अपील की गई है कि वे किसी को भी अतिरिक्त राशि न दें। स्वयं सहायता समूहों की भूमिका और चिंता मध्याह्न भोजन अथवा अन्य विद्यालयीन व्यवस्थाओं में स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यदि वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा प्रभाव इन समूहों की आर्थिक स्थिति और कार्यप्रणाली पर पड़ता है। ऐसे में वायरल आरोपों ने समूहों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है। प्रशासनिक पुष्टि का इंतजार अब तक शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन से जुड़ा गंभ
- SHIVAM Kashyap
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भारतीय शिक्षाविद् देशराज विक्रांत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया
शिक्षा, समावेशन और शांति संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय शिक्षाविद् सिवान बिहार निवासी देशराज विक्रांत, एलएम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate in Education)…
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