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उत्तर प्रदेश
खंडन एवं कड़ी आपत्ति
JITENDRA SINGH pratapgarh up
11/07/2026
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11/07/2026
खंडन एवं कड़ी आपत्तिअखंड भारत न्यूज़ ब्राइट टाइम्स राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक में प्रकाशित उस समाचार का सख्त शब्दों में खंडन और विरोध करता है, जिसमें वायरल ऑडियो प्रकरण से डॉ. रुद्र प्रताप सिंह का नाम बिना किसी आधिकारिक साक्ष्य, पुलिस पुष्टि अथवा सक्षम जांच एजेंसी की रिपोर्ट के जोड़ने का प्रयास किया गया है।किसी भी समाचार का आधार तथ्य, साक्ष्य और आधिकारिक पुष्टि होनी चाहिए, न कि अपुष्ट चर्चाएं, कथित सूत्र या अनुमान। अब तक ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है, जिससे यह स्थापित हो कि वायरल ऑडियो या उससे जुड़े विवाद में डॉ. रुद्र प्रताप सिंह की कोई भूमिका है। ऐसे में उनका नाम समाचार में शामिल किया जाना गंभीर आपत्ति का विषय है।डॉ. रुद्र प्रताप सिंह एक प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं, जिन्होंने समाज में अपनी अलग पहचान और सम्मान अर्जित किया है। बिना पुष्ट प्रमाण किसी सम्मानित व्यक्ति का नाम विवादों से जोड़ना न केवल उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाता है, बल्कि जिम्मेदार पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें कानून और सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। लेकिन बिना प्रमाण किसी का नाम सार्वजनिक करना न्याय, निष्पक्षता और पत्रकारिता—तीनों के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।अखंड भारत न्यूज़ संबंधित समाचार माध्यम से मांग करता है कि वह इस विषय में तथ्यों का निष्पक्ष सत्यापन करे और यदि डॉ. रुद्र प्रताप सिंह का नाम पर्याप्त आधार के बिना प्रकाशित किया गया है, तो तत्काल उसका खंडन अथवा स्पष्टीकरण प्रकाशित कर उनकी प्रतिष्ठा को हुई संभावित क्षति की जिम्मेदारी स्वीकार करे।पत्रकारिता का धर्म तथ्यों को सामने लाना है, किसी सम्मानित नागरिक को अपुष्ट आरोपों के आधार पर विवादों में घसीटना नहीं।– पत्रकार जितेन्द्र सिंहअखंड भारत न्यूज़
10/07/2026
(no title)
20/05/2026
मान्धाता नगर पंचायत में रोड लाइट न होने से लगातार हो रहे हादसे, प्रशासन बेखबर
18/05/2026
અખંડ ભારત ન્યૂઝ તરફથી અમદાવાદના કાળી ગામ ખાતે નિવાસ કરતા અને સાબરમતી વિસ્તારમાં પોતાના સારા સ્વભાવ તથા આગવા વ્યક્તિત્વ માટે જાણીતા શ્રી બળદેવભાઈ રબારીના લાડકા પુત્રને જન્મદિવસની હાર્દિક શુભકામનાઓ પાઠવવામાં આવે છે। ભગવાન તેમને દીર્ઘ આયુષ્ય, ઉત્તમ આરોગ્ય, સુખ-સમૃદ્ધિ અને ઉજ્જવળ ભવિષ્ય આપે તેવી પ્રાર્થના. 🎂💐🎉 “જન્મદિવસ મુબારક”
04/05/2026
पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित, बच्चों को वितरित की गई कॉपी, कंपास बॉक्स व मिठाई लखनऊ/स्थानीय संवाददाता।
28/04/2026
ब्रेकिंग | हरखपुर में ‘नवीन परती’ जमीन पर कब्जा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठे सवाल
28/04/2026
रास्ते का विवाद या कब्जे की कोशिश? हरखपुर में ‘मिट्टी’ मामला बना बड़ा मुद्दा, प्रशासन एक्टिव ✍️ जितेन्द्र सिंह, पत्रकार मान्धाता (प्रतापगढ़), दिनांक: ____ मान्धाता नगर पंचायत के हरखपुर वार्ड संख्या 9 से जुड़ा एक प्रकरण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने विकास कार्यों की पारदर्शिता, निजी संपत्ति के अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, “मिट्टी डलवाने” के नाम पर सरकारी धन के उपयोग का मामला सामने आया है, जबकि संबंधित भूमि को निजी (बैनामा/रजिस्टर्ड) बताया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही हैं, तो यह स्पष्ट रूप से प्रश्न उठता है कि बिना भूमि स्वामी की अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया के किसी भी प्रकार का कार्य कैसे कराया गया। भारतीय विधिक व्यवस्था के तहत निजी संपत्ति का अधिकार संरक्षित है। किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को यह अधिकार नहीं है कि वह बिना विधिक स्वीकृति किसी की भूमि का उपयोग करे। विकास कार्यों के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया—प्रशासनिक अनुमति, अभिलेखीय पुष्टि और पारदर्शिता—का पालन अनिवार्य है। 🗣️ कोट सेक्शन (मुख्य बातें) “निजी भूमि पर बिना अनुमति किया गया कोई भी कार्य कानून के दायरे में जांच का विषय होता है।” “विकास कार्य पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया के तहत ही होने चाहिए, अन्यथा यह अनियमितता मानी जाएगी।” “भ्रामक जानकारी और दबाव की राजनीति से केवल समाज में तनाव बढ़ता है, समाधान नहीं निकलता।” “ईमानदार प्रशासनिक कार्रवाई ही जनविश्वास की सबसे बड़ी आधारशिला है।” इसी बीच, स्थानीय स्तर पर यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ लोग वास्तविक तथ्यों से हटकर भ्रामक स्थिति प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि जिन व्यक्तियों के मकान पहले से मुख्य सड़क से जुड़े हैं, वे स्वयं को “बिना रास्ते” का दिखाकर दूसरों की आबादी/निजी भूमि पर दावा करने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार की प्रवृत्ति न केवल विवाद को जन्म देती है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करती है। कुछ मामलों में यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि संगठित रूप से दबाव बनाकर या गलत जानकारी फैलाकर जमीन पर कब्जा करने जैसी कोशिशें की जा रही हैं, जिसे आम बोलचाल में “भूमाफिया जैसी प्रवृत्ति” कहा जाता है। हालांकि, ऐसे सभी आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव है। सकारात्मक पक्ष यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों—विशेषकर SDM और DM स्तर—द्वारा तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष और जिम्मेदार कार्रवाई की गई है। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासन कानून के अनुपालन और जनहित की रक्षा के प्रति गंभीर है। ऐसे निर्णय आम जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कुछ लोग और तथाकथित “फर्जी पत्रकार” अपुष्ट या भ्रामक जानकारी के आधार पर विवाद को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल समाज में भ्रम और तनाव उत्पन्न करती है, बल्कि ईमानदारी से कार्य कर रहे अधिकारियों की छवि को भी प्रभावित करती है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि, निष्पक्षता और जनहित की रक्षा है, न कि सनसनी फैलाना। निष्कर्षतः, आवश्यक है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए तथा यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही, ईमानदारी से कार्य कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल बनाए रखना और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। जब कानून का सम्मान, प्रशासन की निष्पक्षता और पत्रकारिता की जिम्मेदारी एक साथ चलती है, तभी समाज में स्थिरता, न्याय और जनविश्वास कायम रहता है
28/04/2026
रास्ते का विवाद या कब्जे की कोशिश? हरखपुर में ‘मिट्टी’ मामला बना बड़ा मुद्दा, प्रशासन एक्टिव
28/04/2026
कानून, प्रशासन और जनविश्वास की कसौटी पर हरखपुर का मामला पत्मान्धाता (प्रतापगढ़), दिनांक: ____ मान्धाता नगर पंचायत के हरखपुर वार्ड संख्या 9 से जुड़ा एक प्रकरण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने विकास कार्यों की पारदर्शिता, निजी संपत्ति के अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, “मिट्टी डलवाने” के नाम पर सरकारी धन के उपयोग का मामला सामने आया है, जबकि संबंधित भूमि को निजी (बैनामा/रजिस्टर्ड) बताया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही हैं, तो यह स्पष्ट रूप से प्रश्न उठता है कि बिना भूमि स्वामी की अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया के किसी भी प्रकार का कार्य कैसे कराया गया। भारतीय विधिक व्यवस्था के तहत निजी संपत्ति का अधिकार संरक्षित है। किसी भी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को यह अधिकार नहीं है कि वह बिना विधिक स्वीकृति किसी की भूमि का उपयोग करे। विकास कार्यों के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया—प्रशासनिक अनुमति, अभिलेखीय पुष्टि और पारदर्शिता—का पालन अनिवार्य है। इसी बीच, स्थानीय स्तर पर यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ लोग वास्तविक तथ्यों से हटकर भ्रामक स्थिति प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि जिन व्यक्तियों के मकान पहले से मुख्य सड़क से जुड़े हैं, वे स्वयं को “बिना रास्ते” का दिखाकर दूसरों की आबादी/निजी भूमि पर दावा करने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार की प्रवृत्ति न केवल विवाद को जन्म देती है, बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करती है। कुछ मामलों में यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि संगठित रूप से दबाव बनाकर या गलत जानकारी फैलाकर जमीन पर कब्जा करने जैसी कोशिशें की जा रही हैं, जिसे आम बोलचाल में “भूमाफिया जैसी प्रवृत्ति” कहा जाता है। हालांकि, ऐसे सभी आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव है। सकारात्मक पक्ष यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों—विशेषकर SDM और DM स्तर—द्वारा तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष और जिम्मेदार कार्रवाई की गई है। यह कदम दर्शाता है कि प्रशासन कानून के अनुपालन और जनहित की रक्षा के प्रति गंभीर है। ऐसे निर्णय आम जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कुछ लोग और तथाकथित “फर्जी पत्रकार” अपुष्ट या भ्रामक जानकारी के आधार पर विवाद को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल समाज में भ्रम और तनाव उत्पन्न करती है, बल्कि ईमानदारी से कार्य कर रहे अधिकारियों की छवि को भी प्रभावित करती है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि, निष्पक्षता और जनहित की रक्षा है, न कि सनसनी फैलाना। निष्कर्षतः, आवश्यक है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए तथा यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही, ईमानदारी से कार्य कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल बनाए रखना और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही आवश्
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