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सिविल सर्जन के चेहरे पर कालिख अस्पताल की लापरवाही पर शिवसेना का उग्र विरोध

सुरेन्द्र दुबे (धार )  सीधी  मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने एक नया रूप धारण कर लिया है। यहां के जिला अस्पताल में हाल ही में एक युवक की कथित लापरवाही से मौत के बाद आक्रोशित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के चेहरे पर कालिख पोत दी। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मचा रही है, बल्कि आम जनता के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक निजी नर्सिंग होम की ओर जा रहे डॉ. खरे को रोककर की गई इस कार्रवाई ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। क्या यह सिर्फ एक संगठित विरोध था या स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक चेतावनी? आइए, इसकी परतें खोलें।

 

मरीज की मौत: लापरवाही का काला सच

 

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सब कुछ तब शुरू हुआ जब ग्राम मुठिगमा के 25 वर्षीय अजय साकेत, जो खुद शिवसेना के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे, अचानक बीमार पड़ गए। उन्हें तत्काल सीधी जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन परिवार के आरोपों के मुताबिक, रात के समय न तो कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद था और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर की पाइप सही हालत में। कथित तौर पर फटी पाइप से ऑक्सीजन देने और गलत इंजेक्शन लगाने से मात्र पांच घंटों में अजय की सांसें थम गईं।

 

परिवार का दर्द: सड़क पर शव, आंसुओं में गुस्सा

 

परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने चीख-चीखकर कहा, “हमारा बेटा इलाज के नाम पर मौत का शिकार हो गया। अस्पताल में भ्रष्टाचार और सुविधाओं की कमी ने एक परिवार को बर्बाद कर दिया।” इस दर्द भरी पुकार ने शिवसेना के केंद्रीय नेतृत्व तक बात पहुंचा दी।

 

शिवसेना का हमला: निजी क्लिनिक पर घेराबंदी

 

संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे, जो स्वयं इस घटना से गहराई से जुड़े हुए हैं, ने इसे “जिला अस्पताल की निष्ठुरता का काला अध्याय” करार दिया। उन्होंने कहा, “डॉक्टरों की अनुपस्थिति और टूटी-फूटी मशीनरी ने निर्दोष जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है। अगर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो हम सड़कों पर उतरेंगे।”

 

पांडे के नेतृत्व में एक छोटा सा समूह डॉ. खरे का पीछा करते हुए हाउसिंग बोर्ड स्थित उनके निजी नर्सिंग होम पहुंचा। वहां डॉ. खरे को घेरकर न सिर्फ नारेबाजी की, बल्कि एक कार्यकर्ता ने उनके चेहरे पर कालिख पोत दी। यह दृश्य इतना नाटकीय था कि आसपास के लोग सन्न रह गए। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई – कोई इसे न्याय की जीत बता रहा था, तो कोई हिंसक कदम।

 

प्रशासन में हड़कंप: जांच या खानापूर्ति?

 

इस घटना के बाद जिला प्रशासन में हलचल मच गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और डॉ. खरे की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ औपचारिकता है? अस्पताल की अव्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है – दवाओं की किल्लत, स्टाफ की कमी और रखरखाव की अनदेखी। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार मरीजों को निजी क्लिनिकों की ओर धकेल दिया जाता है, जहां इलाज महंगा पड़ता है।

 

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम जांच कर रहे हैं। अगर लापरवाही साबित हुई, तो सख्त कार्रवाई होगी।” वहीं, शिवसेना ने मांग की है कि डॉ. खरे को तत्काल निलंबित किया जाए और अजय की मौत की स्वतंत्र जांच हो।

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