

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा हमीरपुर। मंगलवार की रात चारों ओर मुस्लिम समुदाय के लोग सारी रात इबादत करते और अपने पूर्वजो की कब्रों और मजारों में आते जाते देखे गई। और सारी रात मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इबादत में गुजारी।
मंगलवार को मुस्लिम समुदाय का महत्वपूर्ण त्यौहार शब ए बारात धूमधाम से मनाया गया। जिसको लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पहले से ही अपने पूर्वजों की कब्रिस्तानों की सफाई पुताई करना शुरू कर दिया था और मंगलवार की रात मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण रात रही, जिसमे लोगों ने सारी रात इबादत में गुजारी।और मुस्लिम समुदाय के लोग अपने पुरखों की कब्रिस्तान और मजारों पर आते जाते रहे जबकि मस्जिदों में भी नफिल नमाज़ अदा करने के लिए लोग इकट्ठे रहे। शब ए बारात को लेकर नगरपालिका की ओर से सामूहिक कब्रिस्तान में साफ सफाई और बिजली की व्यवस्था की गई थी जबकि कोतवाली पुलिस लगातार भ्रमण करती रही।

इस सम्बन्ध में मुस्लिम धर्म गुरु और शहर इमाम मौलाना करामात उल्लाह ने बताया कि,यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद फज़ीलत(महिमा) की रात मानी जाती है, इस दिन विश्व के सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं।क्षमा की रात (Maghfirat): ‘शब’ का अर्थ रात और ‘बारात’ का अर्थ बरी (मुक्ति) होना है। यह रात जहन्नुम (नरक) से बरी होने और अल्लाह की रहमत पाने के लिए विशेष मानी जाती है, जिसमें सच्चे मन से तौबा करने वालों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।शब-ए-बारात की हदीस के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) शब-ए-बारात के दिन मदीना के अल-बक़ी कब्रिस्तान में गए थे। उन्होंने वहाँ दफ़न सभी मुसलमानों की आत्माओं के लिए दुआ की थी, और इसी कारण मुसलमान इस रात अपने प्रियजनों की कब्रों पर जाकर उनकी आत्माओं की शांति और क्षमा के लिए प्रार्थना करते हैं। अगले दिन का रोजा: शब-ए-बारात की रात के बाद, अगले दिन (15 शाबान) को रोजा (उपवास) रखना भी सवाब का काम माना जाता है।संक्षेप में, यह इबादत, रहमत और माफी (मगफिरत) की रात है, जो पवित्र रमजान महीने के आने का संकेत भी देती है।

