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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत 100 दिवसीय “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत बाल विवाह मुक्त रथ का शुभारंभ

गणेश पाण्डे डिण्डौरी : 03 फरवरी, 2026
डिण्डौरी बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत जिले में संचालित 100 दिवसीय “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत आज बाल विवाह मुक्त रथ का शुभारंभ किया गया। यह जागरूकता रथ दिनांक 03 फरवरी से 18 मार्च 2026 तक जिले की समस्त परियोजनाओं में भ्रमण कर बाल विवाह रोकने हेतु जनजागरूकता का कार्य करेगा।
बाल विवाह मुक्ति रथ को अपर कलेक्टर जेपी यादव, एसडीएम सुश्री भारती मरावी, डिप्टी कलेक्टर बैद्यनाथ वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्याम सिंगौर की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि अभियान अवधि के दौरान यह रथ प्रतिदिन न्यूनतम तीन परियोजनाओं में भ्रमण करेगा। इसके साथ ही बाल विवाह से संबंधित चिन्हित हॉटस्पॉट एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रूप से अधिक भ्रमण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि प्रभावी जनजागरूकता स्थापित की जा सके।
बाल विवाह मुक्त रथ के माध्यम से गांव-गांव जाकर बाल विवाह की कुप्रथा के दुष्परिणाम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, बच्चों एवं किशोर-किशोरियों के अधिकारों तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन को दी जाएगी। इस अभियान के अंतर्गत प्रचार-प्रसार गतिविधियाँ प्रदीपन संस्था के सहयोग से संचालित की जा रही हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों को बाल विवाह से होने वाले स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक एवं कानूनी नुकसान की जानकारी मिल सके तथा इस सामाजिक कुप्रथा का पूर्ण रूप से उन्मूलन किया जा सके।
रथ के माध्यम से संचालित प्रमुख गतिविधियाँ, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी, बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जनजागरूकता, किशोर-किशोरियों के अधिकारों का प्रचार, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का प्रचार, आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों, ग्राम सभाओं एवं सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी प्रदान की जाएगी।
संबंधित अधिकारियों ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे बाल विवाह रोकने में प्रशासन का सहयोग करें तथा किसी भी बाल विवाह की सूचना तत्काल संबंधित विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें।
संदेशः
“बाल विवाह रोकें – बचपन बचाएँ, भविष्य सँवारें।”

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