

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ़ राजकुमार की रिपोर्ट
सुमेरपुर हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने सावित्री बाई फुले की जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि सावित्री बाई फुले दलितोत्थान की नायिका थीं। इनका पुणे के सतारा जिले के नयागांव में 3 जनवरी 1831 को खन्दोजी नेवसे और लक्ष्मीबाई के घर जन्म हुआ था। इनका दस वर्ष की उम्र में महान समाजसेवी ज्योतिबा राव फुले के साथ विवाह हो गया था। ये भारत की पहली महिला शिक्षक थी। इन्होंने दलित, वंचित और कमजोर वर्ग के लिए बहुत काम किया। शिक्षा के क्षेत्र इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। ये जब पढ़ाने निकलती थी तो इन पर दूषित और गंदे पदार्थ डाले जाते थे, किन्तु ये फिर भी डरती नहीं थी। इन्होंने लगभग 15 विद्यालय खोले। सत्य शोधक समाज की स्थापना की। समाज सेवा करते हुए 10 मार्च 1897 को इनका निधन हो गया था। इस कार्यक्रम में सिद्धा, प्रेम, प्रिन्स, सागर, रामनरायन सोनकर, महावीर प्रजापति, रिचा, पंकज सिंह, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।