

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
दिल ऐसे मुब्तिला हुआ तेरे मलाल में, जुल्फें सफेद हो गईं उन्नीस साल में – हिमांशी बाबरा।
मौदहा हमीरपुर। कस्बे में एक शाम मौलाना सलीम जाफरी साहब के नाम आल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमे हिन्दुस्तान के कोने-कोने से मशहूर शायरों ने अपने-अपने कलामों से खूब वाहवाही बटोरी।
शनिवार को कस्बे के रहमानिया इंटर कालेज प्रांगण में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा व कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन किया गया। जिसमे हिन्दुस्तान के मशहूर शायरों ने अपने-अपने कलामों से खूब वाहवाही बटोरी और श्रोताओं ने शायरी सुन जमकर दाद दी। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे हज कमेटी सदस्य कमरूद्दीन जुगनू एवं मुशायरे की सदारत कर रहे समाजसेवी मौलाना खान, हलीम सिद्दीकी, कन्वीनर एडवोकेट चौधरी जुन्नूरैन व सरपरस्त अब्दुल रहमान ने शमां रौशन कर मुशायरे का आगाज कराया। जिसमे राहीं बस्तवी ने नाते रसूल पढ़कर मुशायरे का आगाज किया। इसके बाद मकामी शायर मसीह निजामी ने अपनी शायरी में जमकर वाहवाही बटोरी। इसके बाद ज़ीरो बांदवी ने मजाहिया कलाम के जरिए श्रोताओं को खूब मनोरंजन कराया। इसके बाद मेरठ से आई मशहूर युवा शायरा हिमांशी बाबरा ने कुछ इस अंदाज में पढ़ा ‘दिल ऐसे मुब्तिला हुआ तेरे मलाल में – जुल्फें सफेद हो गई उन्नीस साल मे’ को खूब पसंद किया और जमकर दाद दी। इसके बाद आए हासिम फिरोजाबादी ने अपने कलामों से जमकर वाहवाही बटोरी उनके इस कलाम ‘रिसालत पे जब बात आई तो सुन लो, किसी से भी दुनिया में हम न दबेंगे – मुकदमे में चलाओ के फांसी चढ़ाओ, हम आई लव मुहम्मद कहते रहेंगे।’ को खूब पसंद किया गया। इसके बाद मशहूर शायर आरिफ़ सैफी के इस शेर ‘मतलब के है यार दिलों के काले हैं , मौका मिलते ही सब डसने वाले हैं – जिसमे जितना जहर है हमको है सब मालूम, सबसे ज्यादा सांप हमी ने पाले हैं।’ को जमकर पसंद किया गया। इसी प्रकार मशहूर शायरा अंजुम रहबर ने कुछ इस अंदाज में पढ़ा कि ‘एक सांवली सी लड़की एक बावली सी लड़की – कच्ची है उम्र जिसकी कुछ दिन से जाने किसकी – चाहत में खो गई है दिवानी हो गई है, एक बावली सी….’ को खूब पसंद किया गया। इसी तरह महोबा से आए हफीज कमाल ने कुछ इस अंदाज में पढ़ा की ‘ खतरा कैसा हो अंजाम उठा लेता है, कितना वजनी हो सामान उठा लेता है – और कोई भी बाप हो बच्चों के लिए अपने सर दुनिया वालों का हर अहसान उठा लेता है।’ इसी तरह खुर्शीद हैदर ने भी शानदार शायरी सुनाई। मुशायरे में हजारों की संख्या में श्रोताओं ने शायरो को खूब पसंद किया। उक्त मुशायरे की निजामत मारूफ खान ने की। मुशायरों में हंगामों और अपनी जज़्बाती शायरी के लिए मशहूर शायर हाशिम फिरोजाबादी के शायरी में जैसे ही सत्ता के विरोध और मुस्लिम समाज को इल्म, एकता और अखंडता को बनाए रखने की लाइनें आईं तो मुख्य अतिथि की नाराजगी तथा मंच से बाहर जाने की भी चर्चा जोरों पर रहीं। चर्चा यह भी रही कि मुख्य अतिथि ने मेहमान शायर हाशिम फिरोजाबादी के साथ अभद्रता कर अश्लीलता की हदें पार की हैं जिससे कहीं न कहीं मौदहा के आवाम की मेजबानी पर सवालिया निशान खड़ा होने की चर्चाएं भी आम हैं। इस दौरान आयोजक निजामुद्दीन पावर सहित समस्त कमेटी सदस्य उपस्थित रहे।
