
सफलता की कहानी
भावी को मिली नई जिंदगी: शासन की योजना बनी उम्मीद की किरण
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना। जब सरकारी योजनाएं सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ मदद नहीं करतीं—बल्कि जीवन बदल देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल है ग्राम पैलेपार की नन्हीं बालिका भावी कलम्बे, जिसने गंभीर बीमारी से जंग जीतकर नई जिंदगी पाई।

जन्म से ही गंभीर बीमारी से जूझ रही थी भावी
ग्राम पैलेपार निवासी किरण कलम्बे की 1 वर्षीय पुत्री भावी जन्म से ही क्रिटिकल सीएचडी (जन्मजात हृदय रोग) से पीड़ित थी। यह स्थिति परिवार के लिए बेहद चिंता का विषय थी, लेकिन उम्मीद की किरण बनी स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं और टीम की सतर्कता।
समय पर पहचान बनी जीवनदायी
आरबीएसके टीम के सतत् भ्रमण और सजगता के चलते चिकित्सा अधिकारियों डॉ. निलिमा तिजारे और डॉ. त्रिलोक मालवी ने समय रहते भावी की गंभीर बीमारी की पहचान की। इसके बाद उसे जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा के सीएचडी कैम्प में जांच के लिए ले जाया गया।
जबलपुर से मुंबई तक इलाज का सफर
जांच के बाद भावी को उच्च स्तरीय उपचार के लिए जबलपुर रेफर किया गया, जहां से आगे उसे मुंबई के नारायण हॉस्पिटल भेजा गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश गोन्नाडे के मार्गदर्शन और परिजनों की हिम्मत से बच्ची को मुंबई ले जाया गया।

सफल ऑपरेशन से लौटी मुस्कान
12 मार्च 2026 को भावी का जटिल हृदय ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। कुछ दिनों के उपचार के बाद अब वह पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान पूरे परिवार के लिए अनमोल खुशी बन गई है।
परिवार ने जताया आभार
इस खुशी के अवसर पर भावी के माता-पिता—किरण कलम्बे और वंदना कलम्बे—ने स्वास्थ्य विभाग, आरबीएसके टीम और जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया।
प्रेरणा का संदेश
यह कहानी सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो शासन की योजनाओं, प्रशासनिक मार्गदर्शन और स्वास्थ्य सेवाओं पर किया जा सकता है।
समय पर जांच, सही मार्गदर्शन और हिम्मत—ये तीन बातें किसी भी बड़ी समस्या को हराने की ताकत रखती हैं।
यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जागरूकता और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, किसी भी जीवन को नई दिशा दे सकता है।