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हमीरपुर :सरकार सख्त, प्रधान बेपरवाह! मनरेगा में चेहरा दिखा, काम नहीं—लरौंड में फर्जी हाजिरी पर बवाल

 

मौदहा/हमीरपुर।मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने एनएमएमएस ऐप के जरिए फेस फोटो आधारित हाजिरी अनिवार्य कर दी है, ताकि मौके पर मौजूद मजदूरों की ही उपस्थिति दर्ज हो और फर्जी भुगतान पर रोक लग सके। लेकिन मौदहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत लरौंड में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। यहां प्रधान और जिम्मेदारों के रवैये में बदलाव न आने से मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी और कागजी कामकाज के आरोप फिर चर्चा में हैं।

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सोमवार को एनएमएमएस पोर्टल पर अपलोड हुई हाजिरी की तस्वीरों और कार्य विवरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक ही दिन में ग्राम पंचायत लरौंड में अलग-अलग स्थानों पर कई सीसी व नाली निर्माण कार्यों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई गई, लेकिन हर कार्य में दूसरी फोटो अपलोड नहीं की गई, जिससे पारदर्शिता और वास्तविक कार्य की स्थिति पर संदेह गहरा गया है।

एक ही दिन में इन स्थानों पर दिखाया गया काम

1. श्याम यादव के घर से साधरी के घर तक

कार्य: सीसी व नाली निर्माण

स्थान: Shyam Yadav Ke Ghar Se Sadhari Ke Ghar Tak, Gram Laroand

फोटो समय: सुबह 08:46 बजे

हाजिरी: 5 मजदूर उपस्थित

स्थिति: Second Photo not uploaded

2. शुगदेव के घर से रामफल के घर तक

कार्य: सीसी व नाली निर्माण

स्थान: Shugdev Ke Ghar Se Ramfal Ke Ghar Tak, Gram Laroand

फोटो समय: सुबह 09:06 बजे

हाजिरी: 5 मजदूर उपस्थित

स्थिति: Second Photo not uploaded

3. हर्षचंद्र के दरवाजे से संजय के दरवाजे तक

कार्य: सीसी व नाली निर्माण

स्थान: Harshchandra Ke Darvaje Se Sanjay Ke Darvaje Tak, Gram Laroand

फोटो समय: सुबह 08:27 बजे

हाजिरी: 5 मजदूर उपस्थित

स्थिति: Second Photo not uploaded

4. देवीदीन के घर से बाबादीन के घर तक

कार्य: सीसी व नाली निर्माण

स्थान: Devideen Ke Ghar Se Babadeen Ke Ghar Tak, Gram Laroand

फोटो समय: सुबह 08:28 बजे

हाजिरी: 6 मजदूर उपस्थित

स्थिति: Second Photo not उप्लोडेड

चेहरा दिखा, लेकिन काम कहां?

सरकार ने मनरेगा में फर्जी मजदूरी रोकने के लिए फोटो आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू की है। नियम के मुताबिक कार्यस्थल की दो बार फोटो अपलोड होनी चाहिए, ताकि मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी और काम की प्रगति का सत्यापन हो सके।

लेकिन लरौंड में सामने आए इन चारों कार्यों में पहली फोटो अपलोड हुई, जबकि दूसरी फोटो गायब है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

क्या मजदूर वास्तव में मौके पर काम कर रहे थे?

क्या केवल फोटो लेकर हाजिरी दर्ज कर दी गई?

क्या भुगतान की प्रक्रिया के लिए कागजी खेल खेला जा रहा है?

क्या फेस हाजिरी जैसी सख्त व्यवस्था भी स्थानीय स्तर पर फेल हो रही है?

प्रधान पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की सख्ती के बावजूद ग्राम प्रधान का रवैया नहीं बदला। मनरेगा में अब भी फर्जी हाजिरी, कागजी मजदूरी और अधूरे/संदिग्ध कार्य की शिकायतें सामने आ रही हैं।

लोगों का कहना है कि एनएमएमएस पोर्टल पर फोटो अपलोड कर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीन पर कार्य की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि—

चारों कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए

मस्टररोल और भुगतान रजिस्टर की जांच हो

दूसरी फोटो अपलोड न होने की जिम्मेदारी तय हो

दोषियों पर सख्त कार्रवाई और रिकवरी की जाए

जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा खेल

एनएमएमएस पोर्टल पर उपलब्ध फोटो, समय, जियो-लोकेशन और कार्य विवरण के आधार पर यदि बीडीओ, एपीओ, तकनीकी सहायक और जिला प्रशासन गंभीरता से जांच कराएं, तो मनरेगा में फर्जी हाजिरी और भुगतान गड़बड़ी का बड़ा मामला उजागर हो सकता है।

अब देखना यह है कि सरकार की सख्त व्यवस्था को गांव स्तर पर कमजोर करने वालों पर कार्रवाई होती है, या फिर मनरेगा में चेहरे की फोटो के नाम पर सिर्फ कागजी खेल चलता रहेगा।

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