
किसान कल्याण वर्ष अंतर्गत ई विकास प्रणाली एवं नरवाई प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता के लिए ई-टोकन व्यवस्था अनिवार्य, नरवाई जलाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन में विकासखंड पांढुर्णा में ई- विकास प्रणाली एवं नरवाई प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिले में उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली को पूर्णतः लागू कर दिया गया है। दिनांक 20 मार्च 2026 से किसी भी उर्वरक विक्रेता एवं समिति द्वारा बिना ई-टोकन के किसानों को उर्वरक विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। अब किसान केवल ई-टोकन के माध्यम से ही उर्वरक क्रय कर सकेंगे।

प्रशिक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी अर्चना डोंगरे ने उपस्थित पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, समिति प्रबंधक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर को ई -विकास प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य उर्वरक की कालाबाजारी रोकना, वितरण में पारदर्शिता लाना, समय की बचत करना तथा किसानों को लंबी कतारों से राहत दिलाना है। साथ ही यह प्रणाली किसानों के डिजिटल सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देती है। ई विकास प्रणाली के अंतर्गत केवल वे ही किसान ई-टोकन के माध्यम से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे, जिनकी फॉर्मर रजिस्ट्री पूर्ण होगी। इस प्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सही किसान को सही समय पर न्यूनतम समय में लाभ प्राप्त हो।

कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विनोद लोखंडे ने नरवाई प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी तथा सभी अधिकारियों को किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि खेतों में आगजनी की जानकारी सैटेलाइट के माध्यम से प्राप्त हो जाती है और यदि कोई किसान नरवाई जलाते हुए पाया जाता है, तो उस पर अर्थदंड के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, समिति प्रबंधक, कृषि विस्तार अधिकारी एवं समिति ऑपरेटर सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
