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सिंगरौली:अदाणी फाउंडेशन की ‘ममता परियोजना’ से गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को मिला पोषण का संबल.।

 

 

 

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अदाणी फाउंडेशन की ‘ममता परियोजना’ से गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को मिला पोषण का संबल….

✍️अमरेंद्र शुक्ला–अखंड भारत न्यूज ✍️

सिंगरौली । मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ करने की दिशा में अदाणी फाउंडेशन निरंतर सार्थक पहल कर रहा है। इसी क्रम में सरई तहसील अंतर्गत धिरौली एवं सुलियरी परियोजना के आसपास के गांवों में ‘ममता परियोजना’ के तहत गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों के लिए पोषण किट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा छोटे बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार लाना और मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसी उद्देश्य के तहत गुरुवार को ग्राम बासी बेरदहा स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में पोषण किट वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं अपने बच्चों के साथ उपस्थित रहीं। इस अवसर पर 15 गर्भवती महिलाओं को पोषण किट तथा 22 कुपोषित बच्चों को निःशुल्क सुपोषण किट वितरित किए गए। कार्यक्रम में पुष्पेंद्र धुर्वे (थाना प्रभारी, लंघाडोल), चंदा पनिका (सरपंच, ग्राम पंचायत बासी बेरदहा), रंजू प्रजापति (कम्युनिटी स्वास्थ्य अधिकारी, बासी बेरदहा) सहित अन्य ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रत्येक गर्भवती महिला को दिए गए पोषण किट में सोयाबीन, मूंग दाल, अरहर दाल, मूंगफली, गुड़ और घी शामिल थे, जबकि कुपोषित बच्चों के लिए तैयार सुपोषण किट में उच्च प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर सामग्री दी गई। इन किटों में शामिल सोयाबीन आधारित पोषण आहार बच्चों के वजन बढ़ाने और कुपोषण दूर करने में प्रभावी भूमिका निभाता है। यह मिश्रण पोषण की दृष्टि से समृद्ध होने के साथ-साथ किफायती और आसानी से उपलब्ध विकल्प भी है।

उल्लेखनीय है कि अदाणी फाउंडेशन द्वारा सुलियरी एवं धिरौली परियोजना क्षेत्रों के आसपास के गांवों में समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। इन शिविरों में सामान्य रोगियों की जांच के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। इन प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और दूरस्थ गांवों के जरूरतमंद लोगों तक समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इन पहलों से बासी बेरदहा, आमडांड़, अमरईखोह, फाटपानी, भलया टोला एवं बजौड़ी जैसे गांवों की सैकड़ों किशोरियां, महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

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