

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
मौदहा क्षेत्र में कई वर्षों से हो रहा है मिट्टी खनन का अवैध कारोबार, जिम्मेदार अधिकारी बने हैं अनजान

हमीरपुर । एक ओर जहां सरकार द्वारा माफियाओं पर शिकंजा कसने हेतु कई अभियान चलाये जा रहे हैं, वहीं मौजूदा सरकार के बड़े नेताओं का किया गया वादा “गरीबों को छेड़ेंगे नहीं माफियाओं को छोड़ेंगे नहीं” जैसे उक्त शब्द धरातल में खनन माफियाओं ने फेल कर दिए हैं, आपको बता दें कि बेखौफ मिट्टी खनन माफिया स्थानीय अधिकारियों से मिलीभगत कर क्षेत्रीय भू संरचना से छेड़छाड़ करते हुए प्राकृतिक संरचना बिगाड़ने का कार्य धड़ल्ले से प्रशासन की जानकारी में खुलेआम चल रहा हैं, मिट्टी खनन का कार्य बेधड़क जिम्मेदार अधिकारियों की भरपूर जानकारी मे चल रहा है, अधिकतर देखा जाए तो इनका मिट्टी खनन का कार्य हर महीने स्थानीय प्रशासन के दर्शन कर चलता ही रहता है,

इनकी जेसीबी धरती का सीना निरंतर चिर रही है, प्रतिदिन मिट्टी का अवैध खनन कर लगातार अधिकारियों के जानकारी होने के बावजूद भी नगर के सड़कों पर फर्राटा भरते हुए नजर आते हैं, इसलिए सयाद स्थानीय प्रशासन की सहमति झलक रही है राजस्व का लंबा चूना लगाने वाले मिट्टी खनन माफियाओ के दौड़ रहे बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों को खाकी व सफेद पुलिस भी इन माफियाओं के ट्रैक्टरों पर रोक नहीं लगा पाती पा रही है, तो फिर इनका चालान करने की हिम्मत आखिर कौन करेगा,यह सवाल शायद हर व्यक्ति के दिमाग पर दौड़ रहा होगा, आरटीओ विभाग भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं करना चाहता, लेकिन खनन कर रहे ट्रैक्टर आरटीओ विभाग की कठोरतम कार्यवाही के दायरे में आते हैं इन पर कार्यवाही क्यों नहीं होती, अक्सर विभाग में दर्ज ट्रैक्टर किसानों के नाम से होते हैं पर भाड़े में यूज किए जाते है, पर भाड़े वाले ट्रैक्टर कमर्शियल होते हैं नियमानुसार उनकी प्लेट पीली होती है, कमर्शियल ट्रैक्टर टैक्स जमा कर भाड़े करने के लिए स्वतंत्र होता हैं, लेकिन मिट्टी खनन माफियाओं के ट्रैक्टरों पर नंबर ही नहीं होता इन माफियाओं के दर्जनों ट्रैक्टरों पर नंबर की जगह इंग्लिश के अल्फाबेट दर्ज किए जाते हैं, जैसे कि मौदहा नगर के मिट्टी खनन ट्रैक्टरों पर इंग्लिश से टी या एम लिखा रहता है, देखा जाए तो अधिकतर ट्रैक्टर किसानू में ही दर्ज होता है फिर भी इन पर विभाग द्वारा कोई कार्यवाही क्यों नहीं होती, मौदहा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत अवैध मिट्टी का खनन इन दिनों धड़ल्ले से चल रहा है। सक्रिय हुए खनन माफिया दिन-रात मिट्टी खनन करा रहे हैं। शासन की लाख प्रयास के बावजूद अवैध मिट्टी खनन पर विराम नहीं लग पा रहा है। पुलिस महकमा भी अनजान बना हुआ है। ग्रामीण अंचलों में खनन माफिया पूरी तरह सक्रिय रहते थे, लेकिन अब स्थानीय शासन प्रशासन के हर माह दर्शन कर शहर में भी बेखौफ होकर धड़ल्ले से कारोबार चलाते हुए उनके मिट्टी से भरे ट्रैक्टर नगर की सकरी रास्ताओ पर भी बेखौफ होकर फर्राटा भर रहे हैं, इतना ही नहीं नगर से शटी हुई नई बस्तियों की कच्ची पड़ी सड़कों को ओवरलोड मिट्टी भरकर खनन माफियाओं के ट्रैक्टरों द्वारा दलदल बना दिया जाता है फिर भी पालिका प्रशासन सहित स्थानीय शासन प्रशासन इन पर चाबुक नहीं कस पा रही है, इनके सिस्टम के चलते जरूर पढ़ने पर पूरी रात जेसीबी से मिट्टी खनन चलता ही रहाता है। कुछ ही घंटे में उपजाऊ खेत तालाब में तब्दिल कर देते है, क्षेत्र के तालाबो की पार में भी खनन माफियाओं की जेसीबी गरजने में कसर नहीं छोड़ती, इनका प्रभाव इतना है कि पुलिस व विभागीय टीम पहुंचने से पूर्व ही जेसीबी व ट्रैक्टर आसानी से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिए जाते हैं। ओवरलोड ट्रैक्टर ग्रामीण अंचलो की सड़कों पर धड़ल्ले से रफ्तार भर रहे है। मौदहा विकासखंड क्षेत्र के अधिकांस ग्राम पंचायतो में प्रधान और सचिव मिलकर “आम के आम गुठलियों के दाम” के तहत मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों का प्रयोग कर खोदी गई मिट्टी को मिट्टी माफियाओं को सेट कर बेच दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ मजदूरों की कागजों में उपस्थिति दिखाकर जॉब कार्ड से पैसे निकालने का हुनर भी इनको आता है, जो नगर में मिट्टी से भरे ट्रैक्टर बिना नबर प्लेटो के ही फर्राटा भरते हुए अक्सर देखे जाते हैं, पर सायद किसी की क्या हिम्मत की इनका चालान कर दे, मिट्टी खनन माफियाओं के चल रहे मासिक सिस्टम में फस कर खाकी व राजस्व सहित आरटीओ और संबंधित अधिकारियो की लालची निगाहें इन पर कोई कार्यवाही न करते हुए इन पर रोक भी नहीं लगा पाते है, जिसके कारण खनन माफिया मिट्टी के जरूरतमंदों से मिलकर मिट्टी को हजारों लाखों में बेचकर सरकार को जमकर चूना लगा रहे हैं, इसके साथ ही लालची अधिकाकरी अपनी जेब को ध्यान में रखते हुए जेब और बैंक दोनो भरने का कार्य करते ही रहते है।