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लाइवलीहुड वेंचर पेरिस फ्रांस, ऐरिक सोबेउरन CEO पेरिस ब्लोच हेड आफ कार्बन ने किया मनावर का भ्रमण

जब आजीविका संवर्द्धन और कार्बन-आधारित वृक्षारोपण का प्रयास एक साथ चलते हैं। तो वे न केवल पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाते हैं..

अमित सिंह ट्रांसफॉर्मिंग रुलर इंडिया फाउंडेशन ने करवाया दल को भ्रमण…..

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

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मनावर। जिला धार।। गत दिवस मनावर ब्लॉक में दो दिवसीय लाइवलीहुड वेंचर पेरिस फ्रांस, ऐरिक सोबेउरन CEO पेरिस ब्लोच हेड आफ कार्बन ने किया मनावर का भ्रमण दल को ट्रांसफॉर्मिंग रुलर इंडिया फाउंडेशन से अमित सिंह, अनिश, अशोक कुमार, गोरव मिश्रा, अमित सिंह, राजेश सिंह, स्वाति, राधिका, यशपाल पटेल, संजय भुरिया, मयंक सोनी द्वारा भ्रमण करवाया गया। जिसमें ग्रामीण आजीविका तंत्र और कार्बन-समृद्ध वृक्षारोपण मॉडलों को नज़दीक से समझने का अवसर मिला।

इस भ्रमण का उद्देश्य यह जानना था कि कैसे पौधारोपण आधारित हस्तक्षेप न केवल आय सृजन में सहायक हैं बल्कि पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और किसानों की सोच में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

दल ने वृक्षारोपण की संपूर्ण प्रक्रिया गड्ढा खुदाई, इनपुट प्रबंधन, पौधारोपण, सिंचाई, कटाई और विपणन संबंधी गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान यह स्पष्ट हुआ कि वृक्षारोपण केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि कार्बन के जरिये जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने का एक सशक्त उपाय है।

पेड़ अपनी वृद्धि के दौरान वातावरण से कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित कर जैविक पदार्थ में परिवर्तित करते हैं। जिससे वायुमंडलीय कार्बन में कमी आती है और मिट्टी की गुणवत्ता व जैव विविधता में सुधार होता है। यदि इस प्रक्रिया को कार्बन क्रेडिट और प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ा जाए तो यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है।

भ्रमण के दौरान विजय राठौर ग्राम पंचायत गुलाटी से केशर आम उन्नत तकनीक पौधारोपण की जानकारी ली गई और ग्राम पंचायत कलवानी के राजू बर्फा से जैविक खेती पद्धति और नेट हाउस जैसे प्रगतिशील किसानों से मुलाकात हुई। जिन्होंने परंपरागत ज्ञान को नवाचार के साथ जोड़कर जैविक और टिकाऊ कृषि को अपनाया है। इन किसानों के अनुभवों ने यह दिखाया कि स्थानीय नेतृत्व और सामुदायिक प्रयास कैसे कृषि को जलवायु-संवेदनशील और लाभकारी बना सकते हैं।

लाखनकोट ग्राम में समुदाय के साथ हुई चर्चा में संस्थागत व्यवस्थाओं, महिला सहभागिता और स्थानीय शासन की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। ग्राम पंचायत देदला में तोमर सर से चिकु की खेती और ग्राम संगठन सदस्यों की बैठक में भौगोलिक चुनौतियों, पौधारोपण की उपयुक्तता और सामुदायिक स्वामित्व पर गहन संवाद हुआ। इन चर्चाओं ने स्पष्ट किया कि सामुदायिक भागीदारी वाले मॉडल ही दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकते हैं।

भ्रमण का समापन ग्राम पंचायत डोंगरगांव में वृक्षारोपण स्थल पर हुआ। जहाँ टीम ने डॉ. ललित पाटीदार से बातचीत की। उन्होंने अपनी योजना साझा की। जिसके अंतर्गत वे घने, कार्बन-समृद्ध पौधारोपण मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं। जो कम समय में अधिक कार्बन अवशोषित कर जलवायु-स्मार्ट कृषि को गति प्रदान करते हैं।

यह दो दिवसीय भ्रमण इस बात का प्रमाण रहा कि जब आजीविका संवर्द्धन और कार्बन-आधारित वृक्षारोपण प्रयास एक साथ चलते हैं, तो वे न केवल पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देते हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाते हैं। मनावर ब्लॉक में देखा गया कि समुदाय, संस्थाएँ और कॉर्पोरेट साझेदार मिलकर ऐसे मॉडल तैयार कर सकते हैं जो आर्थिक और पारिस्थितिक दोनों दृष्टियों से परिवर्तनकारी सिद्ध हों।

दो दिवसीय भ्रमण में ग्राम संगठन, समुह सदस्य उपस्थित रहे। संकुल समन्वयक प्रेरक दल गीता देवड़ा, साधना, गायत्री कुवाल मनिषा, कविता,रिंकु,अनिता, मनिषा, नंदनी ग्राम संगठन पदाधिकारी जानु दीदी, कुशुम, कमला दीदी, सोना दीदी, शान्ता दीदी उपस्थित रहे।

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