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हमीरपुर:राशन में घटिया सामान दे किया जा रहा उपभोक्ताओं का शोषण

हमीरपुर से ब्यूरों चीफ़ राजकुमार की रिपोर्ट

सुमेरपुर हमीरपुर। सुमेरपुर क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय राशन दुकानों पर उपभोक्ताओं से राशन के साथ सामग्री के नाम पर 100 रुपये प्रति कार्ड वसूले जा रहे हैं। यह पांच सामग्री का यह बंडल घटिया गुणवत्ता का साबुन, वाशिंग पाउडर और खाद्य सामग्री के छोटे पैकेटों से भरा होता है, जिसकी कीमत बाजार में न के बराबर है। उपभोक्ताओं ने इसे खुला शोषण बताते हुए जिलाधिकारी और सदर विधायक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रशासनिक अधिकारियों की शह पर खेला जा रहा भ्रष्टाचार का खेल

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उपभोक्ताओं के अनुसार, हर राशन वितरण के दौरान विक्रेता एक वाशिंग साबुन, एक पैकेट वाशिंग पाउडर, एक छोटा पैकेट पास्ता, एक पैकेट मैकरोनी और एक पैकेट सेवईं थमा देते हैं। इसके बदले 100 रुपये नकद ले लिए जाते हैं। “यह सामग्री इतनी खराब है कि इस्तेमाल ही नहीं कर सकते। कंपनी का नाम तक पता नहीं चलता,” बताती हैं राशन उपभोक्ता अमीन खान ने कहा, “पूरे जनपद में वर्षों से कार्ड धारकों पर यह डाका चल रहा है। आपूर्ति विभाग की चुप्पी संदिग्ध है। दाल में काला तो है ही, खान का आरोप है कि यदि यह बंडल शासन के निर्देश पर जिला स्तर से आ रहा है, तो राशन की दुकानों के सूचना बोर्ड पर अन्य राशन वस्तुओं की तरह इसका नाम, मात्रा और कीमत क्यों नहीं लिखी जाती? बाजार में ऐसी सामग्री की कीमत 20-30 रुपये से ज्यादा नहीं, फिर 100 रुपये क्यों? कई कार्ड धारक बताते हैं कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवार इसे खरीदने को मजबूर हैं, क्योंकि विक्रेता राशन रोक लेते हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा, बल्कि स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ रहा है। क्षेत्रीय उपभोक्ताओं ने बताया कि यह समस्या सालों पुरानी है। पिछले साल भी इसी तरह के शिकायतें आईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। “गरीबों का खून चूसने का धंधा चल रहा है। आपूर्ति निरीक्षक आंखें बंद किए हैं दर्जनों कार्ड धारकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देने का फैसला किया है। उन्होंने मांग की है कि विक्रेताओं पर एफआईआर दर्ज हो, जांच टीम गठित हो और बंडल वसूली पर पूर्ण रोक लगे। सदर विधायक से भी अपील की गई है कि वे विधानसभा में मामला उठाएं। यदि शासन स्तर पर निर्देश हैं, तो उनकी प्रामाणिकता जांचे। उनका कहना है कि यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। गरीबों को सस्ता अनाज देने का वादा करने वाली व्यवस्था में अगर ऐसी अनियमितताएं हैं, तो इसका व्यापक असर पड़ेगा।

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