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*मिनी ब्राजील की गूंज पूरे विश्व में*

*4 फुटबॉल खिलाड़ी एवं 1 कोच जर्मनी में प्रशिक्षण करेंगे प्राप्त*

 

 

*मिनी ब्राजील के फुटबॉल खिलाड़ियों ने दूसरे देशों का ध्यान अपनी ओर किया आकर्षित:- प्रधानमंत्री*

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✍️✍️✍️✍️✍️अखंड भारत न्यूज़ जियाउद्दीन अंसारी

*शहडोल* मिनी ब्राजील के नाम से प्रसिद्ध शहडोल के ग्राम विचारपुर की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। यह गौरव विचारपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों की लगन, समर्पण और कड़ी मेहनत का नतीजा है।

आज देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात कार्यक्रम में शहडोल के मिनी ब्राजील के ग्राम विचारपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों की चर्चा करते हुए करते हुए कहा कि मैं आपको याद कराता हूं मैं पॉडकास्ट मैंने बातों बातों में मध्य प्रदेश के शहडोल के फुटबॉल के क्रेज़ से जुड़ा एक गांव का वर्णन किया था दरअसल 2 साल पहले मैं शहडोल गया था वहां के फुटबॉल प्लेयर से मिला था पॉडकास्ट के दौरान एक सवाल के उत्तर में मैंने शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों का भी जिक्र किया था, यही बात जर्मनी के फुटबॉल खिलाड़ी और कोच डिटमार बयारडरफर ने भी सुनी खिलाड़ियों की लाइफ ,शहडोल की युवा फुटबॉल खिलाड़ियों की लाइफ युवा फुटबॉल खिलाड़ियों की लाइव जर्नी ने उन्हें बहुत प्रभावित किया और प्रेरित किया सही में किसी ने कल्पना भी नहीं की थी के वहां के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दूसरे देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेंगे ,अब जर्मनी के इस कोच ने शहडोल के इस खिलाड़ियों को जर्मनी की एकेडमी में ट्रेनिंग देने की पेशकश की है,इसके बाद मध्य प्रदेश की सरकार ने भी उनसे संपर्क किया है जल्द ही शेड्यूल के हमारे कुछ युवा साथी ट्रेनिंग कोर्स के लिए जर्मनी जाएंगे,मुझे यह देखकर भी बहुत आनंद आता है कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है,मैं फुटबॉल प्रेमियों से आग्रह करता हूं जब समय मिले वह शहडोल जरूर जाएं और वहां हो रहे स्पोटिंग रिवॉल्यूशन को करीब से देखें।

फुटबॉल कोच श्री रईस अहमद ने बताया कि आगामी दिनों में 2 बालक फुटबॉल खिलाड़ी, 2 बालिका फुटबॉल खिलाड़ी एवं 1 फुटबॉल कोच जर्मनी अकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि जर्मनी में होने वाला यह प्रशिक्षण खिलाड़ियों और कोच को न केवल आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्रदान करेगा बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार भी करेगा। विचारपुर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मेहनत, जुनून और सही दिशा में प्रयास करने से ग्रामीण प्रतिभाएँ भी विश्व पटल पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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