नाचना में स्वच्छ भारत अभियान की उड़ी धज्जियां: कचरे के ढेरों से बदहाल हुई ग्राम पंचायत, बीमारियों का खतरा बढ़ा
विशेष रिपोर्ट | नाचना (जैसलमेर)
जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत नाचना में स्वच्छता के दावे कागजों तक ही सीमित सिमट कर रह गए हैं। कस्बे के मुख्य चौराहों, रिहायशी इलाकों और सड़कों के किनारे लगे कचरे के अंबार अब आमजन के लिए मुसीबत का कारण बन चुके हैं। नियमित साफ-सफाई न होने से जगह-जगह सड़ांध फैल रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
समस्या की मुख्य वजहें और वर्तमान स्थिति:
- नियमित उठान का अभाव: कस्बे के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर हफ्तों तक कूड़ा-कचरा पड़ा रहता है।
- आवारा पशुओं का जमावड़ा: कचरे के ढेरों पर दिन-रात आवारा मवेशी और कुत्ते मंडराते रहते हैं, जो प्लास्टिक और गंदगी को पूरी सड़क पर फैला देते हैं। इससे हादसों का डर भी बना रहता है।
- दुर्गंध से राहगीर परेशान: तीव्र दुर्गंध के कारण आसपास के दुकानदारों और वहां से गुजरने वाले राहगीरों का सांस लेना भी दूभर हो चुका है।
ग्रामीणों में रोष:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर आने वाले बजट का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है और पंचायत मूकदर्शक बनी बैठी है।
प्रशासनिक अनदेखी पर उठे सवाल:
एक तरफ जहां सरकार स्वच्छता अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं नाचना ग्राम पंचायत की यह लापरवाही व्यवस्था की पोल खोल रही है। यदि जल्द ही कचरे का निस्तारण नहीं किया गया और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो स्थानीय लोग उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

