
पंढरीनाथ मंदिर मार्ग की मांग को लेकर बेरडी में जनआक्रोश रैली, तहसील कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
सौसर। ग्राम बेरडी के ग्रामीणों, वारकरी भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने पंढरीनाथ विठ्ठल मंदिर तक सुगम और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मंगलवार को विशाल रैली निकालकर तहसील कार्यालय सौसर में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान की मांग की गई।
रैली की शुरुआत भवानी माता मंदिर सौसर से हुई, जो छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची। बड़ी संख्या में ग्रामीण, वारकरी समाज के अनुयायी एवं श्रद्धालु इस आंदोलन में शामिल हुए।

ज्ञापन में बताया गया कि ग्राम बेरडी, तहसील सौसर जिला पांढुर्णा स्थित प्राचीन श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पिछले करीब 100 वर्षों से विजयादशमी पर्व के अवसर पर 10 दिवसीय अखंड हरिनाम सप्ताह का आयोजन होता आ रहा है। इस धार्मिक आयोजन में महाराष्ट्र सहित देशभर से वारकरी संप्रदाय के संतों का आगमन होता है, जहां कीर्तन एवं विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के भव्य पुनर्निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में हरिनाम सप्ताह एवं पूर्णाहुति दहीलाही (काला-कीर्तन) कार्यक्रम के दौरान लगभग एक लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। भारी भीड़ के चलते मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन एवं सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने मांग की कि मंदिर के पीछे स्थित निर्गम द्वार से बेरडी-लोधोखेड़ा मुख्य मार्ग तक श्री नरेंद्र चांडक की भूमि से होकर 50 फीट चौड़ा अस्थायी मार्ग हर वर्ष हरिनाम सप्ताह अवधि के लिए आरक्षित किया जाए। इससे श्रद्धालुओं के आवागमन में सुविधा होगी और एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहन भी आसानी से पहुंच सकेंगे।
इसके अलावा प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया कि यदि संभव हो तो संबंधित भूमि को उचित मुआवजा देकर मंदिर समिति को हस्तांतरित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि भविष्य में स्थायी मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
धरना प्रदर्शन के दौरान एसडीएम ने ग्रामीणों एवं मंदिर समिति को आश्वस्त किया कि दोनों पक्षों से चर्चा कर उचित समाधान निकाला जाएगा। इसके लिए मंदिर समिति की ओर से दो से तीन सदस्यों की टीम प्रशासन के साथ आगे चर्चा करेगी।
हालांकि इस मामले में दूसरे पक्ष की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, जनसुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएं।