

वाराणसी में स्ट्रीट वेंडरों का फूटा गुस्सा: उत्पीड़न के खिलाफ बैठक, कानून पालन की मांग
रिपोर्टर: विवेक सिन्हा
वाराणसी। स्ट्रीट वेंडर सेवा समिति एवं दशाश्वमेध पटरी व्यवसायी संघ (विरासत बाजार) के तत्वावधान में अतिक्रमण के नाम पर हो रहे कथित उत्पीड़न के विरोध में सोमवार को दशाश्वमेध स्थित एक सभागार में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में स्ट्रीट वेंडरों ने हिस्सा लिया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
बैठक को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष ऋषि नारायण ने आरोप लगाया कि पुलिस और नगर निगम द्वारा लगातार वेंडरों को हटाया जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के स्ट्रीट वेंडर (आजीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम 2014 और राज्य सरकार के 2017 के नियमों के तहत वेंडरों को संरक्षण दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा।
दशाश्वमेध पटरी संघ के अध्यक्ष अनूप कुमार गुप्ता ने बताया कि गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले वेंडरों को बार-बार हटाया जा रहा है, जबकि यह क्षेत्र पहले से वेंडिंग जोन के रूप में चिन्हित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वेंडरों और उनके ऊपर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिससे भय का माहौल बना हुआ है।
वेंडरों ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लिए गए ऋण की अदायगी में भी उन्हें कठिनाई हो रही है, क्योंकि बार-बार दुकान हटाए जाने से आय प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि सैकड़ों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।