
जल गंगा संवर्धन अभियान में जनसहभागिता से बाघदेव नाले में झरने का हुआ पुनर्जीवन
कलेक्टर के मार्गदर्शन में श्रमदान से जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत विकासखंड सौसर जिला पांढुर्णा में ग्राम रामुढाना के पास स्थित बाघदेव नाला, जो जंगल से आता है और गर्मी के दिनों में सूख जाता है, वहां शिव मंदिर के पास स्थित झरने का महत्वपूर्ण स्रोत सामने आया।
ग्रामवासियों ने बताया कि इस झरने में वर्षभर पानी रहता है और यदि इसकी नियमित साफ-सफाई की जाए तो जल प्रवाह और अधिक बढ़ सकता है, जिससे गांव के पशुओं-गाय, बैल, बकरी-के लिए पेयजल की व्यवस्था हो सकेगी। साथ ही, जंगल के जंगली जानवरों एवं पक्षियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण जल स्रोत बन सकता है, विशेषकर वर्तमान भीषण गर्मी के समय जब अधिकांश नाले सूख चुके हैं।
इस जनहितकारी कार्य के लिए ब्लॉक समन्वयक श्री अनिल बोबडे द्वारा श्रमदान के लिए प्रेरित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप नवांकुर संस्था, परामर्शदाता एवं वी.एस.डब्ल्यू/एम.एस.डब्ल्यू के छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की गई, तत्पश्चात झरने एवं नाले की साफ-सफाई कर गहरीकरण किया गया, जिससे झरना पुनः बहने लगा।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत आगामी कार्यों पर चर्चा की गई और निर्णय लिया गया कि नाले पर बोरी बांध का निर्माण किया जाएगा। नवांकुर संस्था प्रमुख श्री सुखदेव पाटिल ने जल संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव का आधार बनते हैं- “वही देश बनता है महान, जहां होता है पानी का सम्मान।” परामर्शदाता अखिलेश परिहार ने भी जल संरक्षण की वर्तमान आवश्यकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती पार्वती बाई (भूतपूर्व सरपंच) ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जन अभियान परिषद के माध्यम से हो रहे ऐसे कार्य अत्यंत सराहनीय हैं और वे भविष्य में भी ऐसे प्रयासों में सहयोग करती रहेंगी।
इस श्रमदान कार्यक्रम में नवांकुर संस्था प्रमुख श्री सुखदेव पाटिल, परामर्शदाता श्री अखिलेश परिहार, छात्र-छात्राएं मिता धुर्वे, पूजा सोमकुंवर, सोनल मस्के, रजनी उईके, दीक्षा गजभिये, सोनल मरकाम, संतोष धुर्वे सहित ग्रामवासी पूजा ईवनाती, संतोष सिलु, दिवाकर धुर्वे, सुनील सिलु एवं चंद्रभान बोसम ने सक्रिय सहभागिता निभाई।