

बस्ती। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति और बर्खास्तगी एक ही शिक्षक के मामले में साथ-साथ दिख रही है। इस पूरे प्रकरण में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अनूप कुमार तिवारी और खण्ड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कप्तानगंज प्रभात श्रीवास्तव की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
🔍 क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, एक समाजसेवी द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में बीएसए कार्यालय ने बर्खास्त शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराई। लेकिन जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सूची में शामिल कुछ शिक्षक पेंशन भी ले रहे हैं।
⚠️ फर्जी प्रमाण पत्र और सांठगांठ का आरोप
जानकारी के मुताबिक, जिन शिक्षकों के नाम सूची में हैं, उन पर नौकरी के दौरान फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने का आरोप था। इस मामले की शिकायत एसटीएफ सहित उच्च अधिकारियों से की गई थी।
सूत्र बताते हैं कि—
एसटीएफ पहले ही रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप चुकी थी
इसके बावजूद कार्रवाई के बजाय संबंधित शिक्षक को स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति दिला दी गई
आरोप है कि बीएसए, बीईओ और संबंधित बाबू ने मिलीभगत कर मामला दबाया
इससे आरोपी शिक्षक एफआईआर और रिकवरी से बच गया
💰 सरकारी खजाने को नुकसान
बताया जा रहा है कि इस तरह की सांठगांठ से हर महीने सरकारी खजाने को हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है।
❓ उठते बड़े सवाल
जब शिक्षक ने स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली, तो उसे बर्खास्त सूची में क्यों दिखाया गया?
एक ही व्यक्ति का नाम बर्खास्त और पेंशन सूची दोनों में कैसे?
क्या अधिकारियों ने जानबूझकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया?
🏛️ जांच की मांग
इस पूरे मामले ने बीएसए कार्यालय की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
👉 फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है।