
हनुमान जन्मोत्सव पर जामसांवली धाम में रहेगी भक्ति की गूंज, रामभद्राचार्य की रामकथा और भव्य सुंदरकांड पाठ से गूंजेगा “हनुमान लोक”
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर संस्थान (हनुमान लोक) के ट्रस्ट एवं आयोजक समिति के सान्निध्य में इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 2026 का पावन महोत्सव अत्यंत भव्य और दिव्य स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक पर्व के दौरान जामसांवली धाम भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहेगा, जहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पवनपुत्र श्री हनुमान जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

इस दिव्य आयोजन के अंतर्गत अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। 29 मार्च से 2 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के श्रीमुख से भव्य श्रीराम कथा का आयोजन होगा। कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, धर्म और भक्ति के संदेशों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहेगा।
इसी क्रम में 28 मार्च को शाम 7:30 बजे पूज्य विवेकजी महाराज के सान्निध्य में श्री हनुमत चरित्र का वाचन किया जाएगा, जिसमें हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम, प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा और सेवा भाव की प्रेरक कथाएं सुनने को मिलेंगी।

31 मार्च को रात्रि 7 बजे पूज्य रसराज जी महाराज के सान्निध्य में भव्य सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर लगभग 11,000 श्रद्धालु सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करेंगे, जिससे पूरे धाम में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण निर्मित होगा।
इसके अलावा 1 अप्रैल को रात्रि 8:30 बजे आयोजित होने वाले Live Bhajan Concert में प्रसिद्ध भजन गायिका स्वस्ति मेहुल अपनी मधुर वाणी से भजनों की प्रस्तुति देंगी। उनके भजनों से मंदिर परिसर में भक्तिरस की सरिता प्रवाहित होगी और श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो जाएंगे।
संस्थान के ट्रस्ट एवं आयोजक समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर समयपूर्वक पधारकर प्रभु श्री हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करें और इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बनें। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
समिति के सदस्यों ने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और सनातन संस्कारों को सुदृढ़ करने का महाअवसर है, जिसमें सहभागी होकर श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे।
