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उत्तराखण्ड त्रासदी की स्मृति में काव्यांजलि में बही साहित्य गंगा

उत्तराखण्ड त्रासदी की स्मृति में काव्यांजलि में बही साहित्य गंगा

कविसम्मेलन में काव्य पाठ करते साहित्यकार
लालगंज-प्रतापगढ़। क्षेत्र के रायपुर तियाई अमन बिहार में उत्तराखण्ड त्रासदी 2013 के श्रद्धालुओं की हुई मौत को लेकर स्मृति काव्यांजलि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने देश और समाज से जुड़ी स्थितियो पर काव्यपाठ कर जागरूकता प्रदान किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ संयुक्त अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष रामलगन यादव तथा प्रधान ओमप्रकाश यादव एवं आचार्य अनीस देहाती द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्र्यापण कर किया गया। कार्यक्रम में प्रधान ओमप्रकाश ने आयोजन समिति की ओर से साहित्यकारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। नरेन्द्र निराश ने मां सरस्वती की मनमोहन वंदना प्रस्तुत की। गजलकार डाॅ. नागेन्द्र अनुज ने पढ़ा- हुई हैं आंखें फिर पुरनम तुम्हारी याद आती हैं……। वहीं रायबरेली के शायर कासिम हूनर ने पढ़ा- निकला हूं ढूढ़ने समझदार आदमी, मिल जाय काश शहर में दो चार आदमी…..। कार्यक्रम का संचालन व्यंगकार संतोष सिंह संतोष ने किया। कवि सम्मेलन में गीतकार सत्येन्द्र सिंह सौम्य, परवाना प्रतापगढ़ी, श्याम मनमौजी, आचार्य अनीस देहाती, गीतेश, शब्बीर हैदर सलोनवी, रामलगन यादव आशीष की भी रचनाएं लोगों को पसंद आयी। इस मौके पर अधिवक्ता दीपेन्द्र तिवारी, अजीत सिंह यादव, ज्ञानप्रकाश वर्मा, अरविन्द चैबे, भागीरथी यादव, रामप्रकाश सरोज, मेवा लाल मौर्य, जगदीश प्रसाद यादव, रमेश वर्मा, राकेश पाण्डेय, पवनेश आदि रहे।

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