
*सफलता_की_कहानी :कृषि सखी ने सिखाए प्राकृतिक खेती के गुर, महिला कृषक बनी गांव के लिए प्रेरणा स्रोत*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – जिले के विकासखंड सौसर के ग्राम बारादेवी खापा की निवासी महिला कृषक श्रीमती रामरेखा पाटील आज प्राकृतिक खेती के माध्यम से सफलता की नई मिसाल बन गई हैं। सामान्य महिला कृषक से महिला उद्यमी बनने तक का उनका सफर गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

श्रीमती पाटील के पास कुल 1.348 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से लगभग 0.800 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है। वे अपने खेत में कपास, तुवर, बरबटी, ग्वारफली, भिंडी, बैंगन और गेहूँ जैसी फसलों की प्राकृतिक विधि से खेती कर रही हैं।
उनके परिवार में कृषि के साथ पशुपालन भी आय का प्रमुख स्रोत है। उनके पास 04 देशी पशु (02 साहीवाल गाय एवं 02 बैल) हैं। इन पशुओं से प्राप्त गोबर और गोमूत्र से वे जीवामृत, घनजीवामृत, दसपर्णीय अर्क और नीमास्त्र जैसे जैविक घोल तैयार करती हैं, जिससे खेती की लागत में कमी आई है और रसायन मुक्त शुद्ध अन्न का उत्पादन संभव हो रहा है।
आय के स्रोत दूध उत्पादन से लगभग 80 हजार रुपये सब्जी एवं अन्य फसलों से लगभग 1.50 लाख रुपये
इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 2.30 लाख रुपये हो गई है। प्राकृतिक खेती अपनाने से उत्पादन लागत कम हुई है और लाभ में वृद्धि हुई है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।
श्रीमती रामरेखा पाटील ने कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वर्तमान में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। वे अपने गांव के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
आज अपनी मेहनत, नवाचार और जागरूकता के माध्यम से वे गांव की महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई हैं।