
*चुप न रहें, संवाद करें: महिलाओं को दिया मानसिक सेहत का मंत्र*
*कुर्सी दौड़ और खेलों से उत्साहपूर्वक मनाया गया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस*
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – ग्रामीण परिवेश में महिलाएं अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबकर अपनी सेहत की अनदेखी कर देती हैं। वे शारीरिक थकान को तो समझ लेती हैं, लेकिन मानसिक तनाव, घबराहट और अवसाद जैसे गंभीर विषयों को प्रायः नजरअंदाज कर देती हैं। जब तक एक महिला मानसिक रूप से शांत और खुशहाल नहीं होगी, तब तक वह अपने परिवार का सही ढंग से पालन-पोषण नहीं कर सकती। यह प्रेरणादायी विचार जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुनंदा डोंगरे ने बड़चिचोली में ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा नलम मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।

कार्यक्रम में संस्था के निदेशक श्री विजय धवले, स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती सरिता पराडकर, शबनम शेख, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती बेगम शाह, क्षेत्र की अनेक महिलाएं तथा संस्था के नलम कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं के मनोरंजन और मानसिक स्फूर्ति को ध्यान में रखते हुए आयोजित विभिन्न रोचक खेल प्रतियोगिताओं से हुई। दैनिक जीवन की व्यस्तताओं को कुछ समय के लिए भूलकर ग्रामीण महिलाओं ने कुर्सी दौड़ और नींबू दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। खेल-कूद के माध्यम से महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि उनका मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान समाज की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर संस्था निदेशक श्री विजय धवले ने बताया कि संस्था द्वारा नलम मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से मानसिक रूप से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्था केवल दवाइयों की व्यवस्था ही नहीं कर रही, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि प्रभावित व्यक्ति दोबारा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
श्री धवले ने विश्वास व्यक्त किया कि मानसिक रूप से सशक्त महिलाएं ही समाज में व्याप्त रूढ़िवादी जंजीरों को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई और अपनी समस्याओं पर खुलकर संवाद करने का संकल्प लिया।