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संत जगनाडे सभागृह में मातृशक्ति का शंखनाद, नारी के समर्पण और सामर्थ्य को समर्पित रहा महिला दिवस

संत जगनाडे सभागृह में मातृशक्ति का शंखनाद, नारी के समर्पण और सामर्थ्य को समर्पित रहा महिला दिवस
संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – नगर के संत जगनाडे सभागृह में तेली समाज महिला संगठन के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं रंगपंचमी का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, उत्साह और प्रेरणादायक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज की मातृशक्तियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत एवं परिचय के साथ हुई। इस अवसर पर तेली समाज महिला संगठन की अध्यक्ष देविकाताई जगदीश भांगे ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की नारी केवल घर-परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के हर क्षेत्र में अपनी क्षमता और नेतृत्व का परचम लहरा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज बड़ी-बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रही हैं, आसमान में हवाई जहाज उड़ा रही हैं और देश की सीमाओं पर डटकर मातृभूमि की रक्षा भी कर रही हैं।


उन्होंने आगे कहा कि एक महिला अपने जीवन में कई भूमिकाएं निभाती है। वह एक सफल पेशेवर होने के साथ-साथ अपने त्याग, समर्पण और संस्कारों से एक स्वस्थ, सशक्त और संस्कारवान समाज की नींव भी रखती है। महिला दिवस जैसे आयोजन समाज में नारी शक्ति के योगदान को सम्मान देने और नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान रंगों के पावन पर्व रंगपंचमी का भी उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया गया। उपस्थित महिलाओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर प्रेम, सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। पूरे सभागार में उत्साह और उमंग का वातावरण देखने को मिला, जिसने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को और भी सशक्त बनाया।


इस गरिमामय अवसर पर समाज की अध्यक्ष देविकाताई भांगे, उपाध्यक्ष रेवतीताई घोडे, कोषाध्यक्ष रश्मीताई कलमघाड, संरक्षक नंदाताई घाटोडे सहित समाज की अनेक वरिष्ठ एवं सक्रिय मातृशक्तियों की विशेष उपस्थिति रही। सभी ने अपने विचारों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन आपसी शुभकामनाओं और महिला सशक्तिकरण के संकल्प के साथ किया गया। यह आयोजन समाज में महिलाओं की भूमिका, सम्मान और सामर्थ्य को समर्पित एक यादगार पहल साबित हुआ।

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