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मौनी अमावस्या…केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने मां नर्मदा में लगाई आस्था की डूपकी

आत्मचिंतन, सेवा, स्नान–दान से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने का अनूठा पर्व.. मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य से साधक को मिलता है विशेष पुण्य लाभ..



रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। सनातन धर्म में प्रत्येक तिथि का अपना आध्यात्मिक महत्व है, परंतु अमावस्या को विशेष रूप से स्नान, दान, तर्पण और पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इन्हीं अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या को अन्य अमावस्या तिथियों की तरह ही पुण्यदायी अमावस्या कहा गया है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाने वाली यह तिथि आत्मशुद्धि, मौन साधना और पितरों के कल्याण का अनुपम अवसर प्रदान करती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

मौनी अमावस्या उदयातिथि की मान्यता के अनुसार यह पर्व 18 जनवरी को श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा नदी में आस्था की डुपकी लगाई तथा श्रद्धानुसार दान पुण्य किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने संसदीय क्षेत्र खलघाट में सतत प्रवाहमान पुण्य सलिला माँ नर्मदा के तट पर पहुँचकर पवित्र स्नान, दर्शन एवं पूजन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं सर्वजन कल्याण की कामना करते हुए कहा कि सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। यहां सांसद निधि के अंतर्गत 25 लाख रुपये की लागत से बनने जा रहे नर्मदा घाट एवं अन्य विकास कार्यों का केंद्रीय राज्यमंत्री ने स्थल निरीक्षण किया तथा कहा कि नर्मदा घाट निर्माण हो जाने से श्रद्धालुओं को सुविधाजनक एवं सुरक्षित ढंग से स्नान, पूजन एवं दर्शन करने में सहायता मिलेगी। यह घाट न केवल क्षेत्र की आस्था और आध्यात्मिकता को मजबूत करेगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। मां नर्मदा की कृपा से यह विकास कार्य खलघाट क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

बताया जाता है कि 19 जनवरी सोमवार से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होकर 27 जनवरी मंगलवार को समापन होगा। पौराणिक मान्यताओं और शास्त्रों में जिसका विशेष महत्व है।

स्नान का महत्व : मौनी अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, सरयू अथवा किसी भी पवित्र पावन नदीयो में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के समय पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं, परिवार को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, संध्या समय घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाएं गए। यह उपाय पितरों की कृपा प्राप्त करने और घर में शांति एवं खुशहाली लाने में सहायक माना जाता। स्नान के पश्चात मौनी अमावस्या पर दान करना बेहद पुण्यदायी माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान सौ यज्ञों के बराबर पुण्य फल देता है। अन्न, वस्त्र, कंबल तथा जरूरतमंदों की आवश्यक वस्तुओं का दान करने का विधान है। साथ ही गौसेवा, पशु-पक्षियों को चारा और दाना डालना भी विशेष पुण्य प्रदान करता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। मौनी अमावस्या पर अन्न के दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मौनी अमावस्या आत्मचिंतन और सेवा का पर्व है। मौन, स्नान, दान और पितृ स्मरण के माध्यम से यह दिन जातकों को जीवन को शुद्ध करने और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है। मौनी अमावस्या पर श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ किए गए पुण्य कर्म न केवल पितरों को मोक्ष प्रदान करते हैं, बल्कि साधक के जीवन में भी शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश का संचार करते हैं।

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