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भारतीय संस्कृति प्रकाशित करने जबकि पाश्चात संस्कृति बुझाने पर बल देती है*:- विनीत सागर महाराज

*भारतीय संस्कृति प्रकाशित करने जबकि पाश्चात संस्कृति बुझाने पर बल देती है*:- विनीत सागर महाराज

संवाददाता मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649

कामां – कस्बा कामां के सकल जैन समाज कामवन द्वारा आचार्य विनीत सागर का 54 वां अवतरण दिवस मनाया गया*
मनुष्य जन्म पाकर जीवन सफल कोई कोई ही बना पाता है क्योंकि जीवन पाना अलग बात होती है सार्थक बनाना अलग बात होती है। पाश्चात संस्कृति बुझाने की ओर इंगित करती है जबकि हम प्रकाशित करने की ओर इंगित करते हैं। उक्त उदगार जैनाचार्य विनीत सागर महाराज ने विजय मति त्यागी आश्रम में 54 वें अवतरण दिवस के दौरान व्यक्त किये।
जैन समाज कामवन के अध्यक्ष अनिल जैन लहसरिया ने बताया कि विजय मती त्यागी आश्रम में 54 वे अवतरण दिवस समारोह का शुभारंभ चित्र अनावरण राकेश अग्रवाल राजरानी परिवार व दीप प्रज्ववलन रमेश चन्द्र शिखर चन्द,चन्द्र प्रकाश जैन बड़जात्या परिवार द्वारा कर किया गया। इस अवसर पर मंगलाचरण व संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए तो पाद प्रक्षालन अजित जैन मनीष जैन सुलोचना जैन अगोनिया परिवार,शास्त्र भेंट महेश चन्द संजय जैन सर्राफ,शिखर चन्द संजय जैन बड़जात्या परिवार द्वारा किया गया।
*गुरु भक्तों ने की गुरु पूजन* भक्ति भाव व दौलत जैन एंड पार्टी के संगीत के साथ बारह गुरु भक्त परिवारों द्वारा अष्ट मंगल द्रव्य स्थापना, जल,चन्द,अक्षत,पुष्प,नैवेद्य, दीप फल व अर्ध्य से गुरु पूजन की तो दिगम्बर जैन महिला परिषद द्वारा महार्घ्य समर्पित किया गया। कार्यक्रम में संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि आम लोगों के जन्मदिन मनाए जाते हैं जबकि सन्तों व महापुरुषों के अवतरण दिवस मनाए जाते हैं।कार्यक्रम का सञ्चालन धर्म जागृति संस्थान के अध्यक्ष संजय जैन सर्राफ ने किया। हर्षोल्लास के साथ गुरु चरणों मे भक्ति रस की धारा प्रवाहित हुई।
*अथितियों का किया सम्मान* कार्यक्रम में दिल्ली, डीग सहित सनी स्थानों से पधारे भक्तों का स्थानीय जैन समाज के पदाधिकारीयों सत्येंद्र प्रसाद जैन,अनिल जैन,देवेंद्र जैन मयंक जैन आदि के द्वारा अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर गुरु के प्रति सुनील जैन पथवारी वाले,अल्का जैन,मनीषा जैन,अंजू जैन,शोभा बड़जात्या आदि द्वारा विनियांजली प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक श्राविकाएं व बच्चे उपस्थित रहे।

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