

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
सुमेरपुर हमीरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने क्रांतिकारियों के द्रोणाचार्य पंडित गेंदालाल दीक्षित की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि गेंदालाल दीक्षित वास्तव में मातृभूमि के सच्चे रखवाले थे। देश की आजादी के संघर्ष में इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका आगरा की बांह तहसील के मई गांव में पंडित भोलानाथ दीक्षित के घर 30 नवंबर 1888 को जन्म हुआ था। ये तीन वर्ष के थे, तभी इनकी मां का निधन हो गया था। इन्होंने मैट्रीकुलेशन के बाद औरैया के डीएवी कालेज में अध्यापकी की। प्रारम्भ से ही ये देशसेवी सोच के थे। इन्होंने देश को दासता से मुक्ति दिलाने की दिशा में शिवाजी समिति के माध्यम से डाकुओं को एकजुट कर गोरों से मोर्चा लिया। मातृवेदी संस्था के द्वारा युवा क्रांतिकारियों में बिस्मिल, अशफाक और रोशन सिंह जैसे सरफरोश तैयार किये। इस नाते ये क्रांतिकारियों के द्रोणाचार्य कहलाये। कालांतर में इन्हें गिरफ्तार कर आगरा और मैनपुरी जिले में रखा गया। ये जेल से फरार होकर अनेक स्थानों के बाद दिल्ली चले गये। आगे चलकर 21 दिसम्बर 1920 को इनका निधन हो गया। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रिचा, महावीर प्रजापति, फूलचंद, रामनरायन सोनकर, रामबाबू, अजय, विकास, सतेन्द्र, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।