
श्रीहित गोपेन्द्रलाल गोस्वामी क़े पावन सानिध्य में हित ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा क़े अंतर्गत हजारों भक्तों का कामवन दर्शनार्थ हुआ आगमन
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
कामां- श्री राधा वल्लभीय संप्रदायाचार्य श्रीहित गोपेन्द्रलाल गोस्वामी क़े पावन सानिध्य में हित ब्रज चौरासी कोस दर्शन यात्रा क़े अंतर्गत हजारों भक्तों का कामवन दर्शनार्थ आगमन हुआ। भक्तों ने मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन व पूजन कर दीप जलाये। मन्दिर विमल बिहारी क़े सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने बताया कि वाराह पुराण के अनुसार कामवन के दर्शन करने से नरक नहीं भोगना पड़ता ।यहां एक रात प्रवास करने से जन्म जन्मान्तर क़े पाप करम नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक दीपक का दान करना या फिर दीप को जलाकर देव स्थान पर रखना ही दीपदान कहलाता है । पंतपुराण से लेकर अग्निपुराण में दीपदान का महत्व बताया गया है. अग्निपुराण में कहा गया है कि जो मनुष्य देव मंदिर अथवा ब्राह्मण के गृह में दीपदान करता है, वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है. पदमपुराण के अनुसार, मंदिरों में और नदी के किनारे दीपदान करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं ।
भूमि पर दीपदान करने से व्यक्ति नरक जाने से बच जाता है. कहा जाता है कि दीपदान करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता मृतकों की सद्धति के लिए दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है । देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भी दीपदान किया जाता है. इसके अलावा यम, शनि, राहू और केतु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए भी दीपदान किया जाता है ।
कामवन स्थित श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थलियों चरणपहाड़ी ,भोजनथाली ,भामासुर की गुफा ,खिसलनी शिला ,दाऊजी के चरण ,कठ्ला, मुकुट ,कामेश्वर महादेव,वृंदा देवी ,गोपीनाथ जी ,
चौरासी खंभा,पंचम पीठाधीश्वर श्री गोकुल चन्द्रमा जी ,सप्तम पीठाधीश्वर श्री मदनमोहन जी ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड सहित अनेकों श्री कृष्ण की पावन व पुनीत लीला व क्रीड़ास्थलियों के दर्शन किये ।