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NH-922 पर बड़ी लापरवाही! 1033 हेल्पलाइन फेल — टोल टैक्स लेने के बाद भी यात्रियों को नहीं मिल रही बुनियादी मदद

 

बक्सर से पटना की ओर यात्रा के दौरान तीन दिन पहले नेशनल हाईवे-922 पर संतोष पाल जी के साथ घटी घटना ने सड़क सुरक्षा और टोल सेवाओं की वास्तविकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रा के दौरान अचानक उनकी गाड़ी का टायर फट गया। उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1033 पर कॉल किया। कॉल रिसीव हुआ और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि “10 मिनट में टीम भेज रहे हैं।”

लेकिन कुछ देर बाद टीम की ओर से आए कॉल ने स्थिति की हकीकत उजागर कर दी। टीम ने साफ शब्दों में कहा कि—

“हमारे पास मैकेनिक उपलब्ध नहीं है, हम कोई मदद नहीं कर सकते।”

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यह प्रतिक्रिया न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।

जब सरकार नियमित रूप से टोल टैक्स वसूलती है, तो फिर हाईवे पर फँसे यात्रियों को बुनियादी सुविधाएँ—जैसे मैकेनिक सेवा, फ़र्स्ट रेस्पॉन्स टीम, या तत्काल सहायता—क्यों नहीं मिलती?

अगर 1033 नंबर पर कॉल करने के बाद भी वास्तविक सहायता न मिले, तो फिर इस हेल्पलाइन का उद्देश्य ही क्या रह जाता है?

यह घटना दर्शाती है कि हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा के दावे ज़मीनी स्तर पर कितने कमजोर हैं।

संतोष पाल जी के साथ हुई यह स्थिति बेहद चिंताजनक और विचारणीय है।

हम परिवहन मंत्रालय और NHAI से जोरदार मांग करते हैं कि:

इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच हो,

1033 हेल्पलाइन को पूरी तरह फ़ंक्शनल बनाया जाए,

और टोल प्लाज़ा पर उपलब्ध सभी आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए।

ताकि भविष्य में कोई भी यात्री हाईवे पर असुरक्षित

या असहाय महसूस न करे।

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