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उमरिया आरटीओ बना दलाली का अड्डा, बिन दलाल के नहीं होता कोई काम

✍️✍️✍️✍️✍️अखंड भारत न्यूज़ जियाउद्दीन अंसारी

  1. उमरिया आरटीओ बना दलाली का अड्डा, बिन दलाल के नहीं होता कोई काम

जिले का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय इन दिनों दलाली के गढ़ के रूप में बदनाम हो चुका है। आम नागरिकों का कहना है कि यहां बिना दलाल के कोई काम संभव ही नहीं है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर वाहन पंजीयन, फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट तक हर काम में दलालों की पकड़ मजबूत है। आरटीओ ऑफिस पहुंचने वाला व्यक्ति सीधा अधिकारी से मिलने की बजाय पहले दलालों के घेरे में फंस जाता है और मोटी रकम वसूलने के बाद ही उसका काम आगे बढ़ाया जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में तैनात आरटीओ अधिकारी की सीधी मिलीभगत के बिना यह खेल संभव नहीं है। ऑफिस के बाहर बैठे दलाल खुलेआम दरें तय करते हैं और लोगों को यही समझाया जाता है कि बिना पैसे दिए काम नहीं होगा। हालात यह हैं कि साधारण लाइसेंस बनवाने के लिए भी लोगों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि सरकार ने सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने का दावा किया था।

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गौर करने वाली बात यह है कि आरटीओ अधिकारी पूरे सिस्टम से वाकिफ होते हुए भी आंखें मूंदे हुए हैं। लोग कहते हैं कि अगर दलालों की जेब गरम नहीं की गई तो फाइल आगे नहीं बढ़ती। कई बार शिकायतें भी हुईं, लेकिन जांच का नतीजा कभी सामने नहीं आया। इससे साफ होता है कि ऊपर तक संरक्षण प्राप्त है।

आरटीओ दफ्तर की इस दलाली ने गरीब और ग्रामीण वर्ग के लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जिन्हें नियम के मुताबिक न्यूनतम शुल्क देकर काम होना चाहिए, वहां उन्हें कई गुना राशि चुकानी पड़ती है। जनता अब सवाल कर रही है कि आखिर कब तक आरटीओ अधिकारी और दलाल मिलकर इस भ्रष्ट तंत्र को चलाते रहेंगे। प्रशासन अगर ईमानदारी से जांच कर कार्रवाई करे, तो सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।

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