
अलीगढ़ न्यूज
अलीगढ़ 18 सितम्बर उप कृषि निदेशक, कृषि रक्षा, डा0 सतीश मलिक ने धान की फसल के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि धान की फसल में कीट-रोग सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न कीट-रोगों का प्रकोप देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि तना वेधक तनों में घुसकर मुख्य शूट को क्षति पहुॅचाता है, जिससे बढ़वार की स्थिति में मृतगोभ तथा बालियॉं आने पर सफेद बाली दिखाई देती हैं, इसके बचाव हेतु क्लोरेन्ट्रालिलिप्रोल 18.5प्रति0 एस0सी0 150 मिली0/है0 अथवा आइसोसाइक्लोसीरम 18.1प्रति0 एस0सी0 300 मिली0/है0 मात्रा को 500 से 600ली0 पानी में घोलकर प्रयोग करें।
ब्राउन प्लांट हापर एवं अन्य प्रकार के फुदकों का प्रकोप भी देखा गया है। जो कि पौधों का रस चूस लेते हैं जिससे हापर वर्न वन जाता है, के उपचार के लिये ट्राईफ्लूजोपाइरीन 10प्रति0$स्पाइनोटोरम 12प्रति0 डब्लू0जी0 250ग्रा0/है0 अथवा पाइमैट्रोजिन 50प्रति0 डब्लू0जी0 300ग्रा0/है0 अथवा डाइनैटोफ्यूरान 20प्रति0 एस0सी0 150 से 200ग्रा0/है0 मात्रा को 500 से 600ली0 पानी में घोलकर प्रयोग करें।
धान में लगने वाली बीमारी शीथ ब्लाइट में शीथ पर अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं, इसका किनारा गहरा भूरा एवं मध्य भाग हल्के भूरे रंग का होता है। इसके नियंत्रण के लिये आईप्रोडियन 50प्रति0 डब्लू0पी0 2.25 किग्रा0/है0 अथवा पैनसाइक्यूरान 22.9प्रति0 एस0सी0 600 से 700 मिली0/है0 अथवा थाइफ्यूजामाइट 24प्रति0 एस0सी0 375 मिली0/है0 अथवा एजोक्सीस्ट्रोविन 14प्रति0$एपॉक्सीकोनाजोल 9प्रति0 750मिली0/है0 की मात्रा को 500 से 600ली0 पानी में घोलकर प्रयोग करें।
धान में लगने वाले फाल्स स्मट रोग में बालियों के कुछ दानें पीले रंग के पाउडर में काले रंग के हो जाते हैं। इसके नियंत्रण के लिये कॉपर हाइड्रोआक्साइड 77प्रति0 डब्लू0पी0 2 किग्रा0/है0 अथवा कॉपर हाइड्रोआक्साइड 53.8प्रति0 डब्लू0पी0 1.5किग्रा0/है0 को 500 से 600 ली0 पानी में घोलकर स्प्रे करें।