
भीलवाड़ा 13 सितंबर । भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने प्रधानमंत्री और राज्य के कृषि मंत्री को पत्र भेजकर यूरिया सब्सिडी को सीधे कृषकों को बैंक खातों में स्थानांतरित करने की मांग की है।
उन्होंने अपने पत्र में बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा जीडीपी में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। केन्द्र सरकार की सरकार की सार्थक नीतियों के कारण देश की कृषि पैदावार का सम्पूर्ण विश्व में निर्यात हो रहा है, जिससे नवीन पीढ़ी भी कृषि की ओर अग्रसर हो रही है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती पैदावार जहाँ एक ओर गर्व की बात है वहीं एक आम समस्या जो सामने आई है वह कृषि उत्पादन में कृषकों द्वारा रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर निर्भरता अधिक होना है। यह उपयोग कृषकों द्वारा सब्सिडी व अधिक पैदावार के लालच में दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है।
विधायक कोठारी ने बताया कि राजस्थान में ही प्रतिवर्ष 24 लाख मैट्रिक टन यूरिया, 9 लाख मैट्रिक टन डीएपी एवं 4 से 5 लाख मैट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट का प्रयोग कृषकों द्वारा किया जाता है जिससे न केवल कृषकों की गाढ़ी कमाई व्यर्थ हो रही है वरन् इसके साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है और उक्त रासायनिक उर्वरक व जहरीले कीटनाशकों से पैदा हुए उत्पादों के उपभोग से प्रदेशवासी भी कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। आज परम्परागत जैविक कृषि से उत्पादन करने वाले कृषकों की संख्या बहुत नगण्य रह गई है।
उन्होंने इसी समस्या को देखते हुए समय समय पर प्रधानमंत्री ने भी मन की बात कार्यक्रम में देश की जनता को जैविक उत्पाद प्रयोग में लेने और देश के कृषकों को जैविक कृषि करने हेतु प्रेरित किया जाता रहा है।
कोठारी ने अपने पत्र में बताया कि विगत वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा रासायनिक उर्वरक सब्सिडी पर व्यय 3 गुना से अधिक हो गया है। केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व में उपभोक्ताओं को गैस सब्सिडी पर उज्जवला योजना लाने से कई सार्थक परिणाम दृष्टिगत हुए हैं। यदि उज्जवला योजना समान उर्वरक सब्सिडी की राशि को सीधे ही कृषकों के खाते में (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डीबीटी) हस्तांतरित कर दें तो पात्र किसानों तक सुनिश्चित रूप से पहुँचेगा।
बाजारों में उक्त उर्वरक बिना किसी सब्सिडी के बेचा जाये तो कृषको को यह विकल्प मिल जायेगा कि वह अधिक कीमत देकर रासायनिक उर्वरक की तरफ जाने की बजाय कम कीमत पर अपने पास मौजूद साधनों से जैविक प्राकृतिक कृषि की तरफ अग्रसर होगा। वर्तमान में फसलों की बुवाई के समय उर्वरक की सबसे अधिक आवश्यकता होती है तब सभी राज्यों से उर्वरकों की कालाबाजारी एवं उर्वरकों की कृत्रिम कमी पर अंकुश लगेगा।
कालाबाज़ारी एवं नकली खाद की समस्या से निजात मिलेगी और किसानों को यूरिया वास्तविक बाजार मूल्य पर खरीदने की सुविधा मिलेगी।रासायनिक उर्वरकों की अधिकता के कारण जो कैंसर जैसे भयावह रोग हो रहे हैं, उनसे राहत मिलेगी।
जैविक प्राकृतिक कृषि जहाँ भूमि को उपजाऊ बनाती है वहीं रासायनिक उर्वरक भूमि की उर्वरा शक्ति को कम करती जा रही है।
उर्वरक सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के खाते में हस्तांतरित (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डीबीटी) करने से पारदर्शिता बनी रहेगी व भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
विधायक कोठारी ने अपने पत्र में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गत बजट में प्रधानमंत्री प्रणाम (पीएम-प्रणाम) योजना शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य है कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करके वैकल्पिक उर्वरकों से खेती को बढ़ावा दिया जाये। उक्त योजना के उद्देश्यों में कहा गया है कि रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करके बचाई गई सब्सिडी की अतिरिक्त सहायता राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को दी जायेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री से देश में रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक के उपभोग की अत्यधिक प्रवृत्ति के कारण भारतवासियों के स्वास्थ्य और कृषि भूमि पर प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए रासायनिक उर्वरकों पर देय सब्सिडी को सीधे उत्पादक कंपनी को न देकर कृषकों के खातों में जमा कराकर जैविक कृषि आधारित उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन दिया जाए।