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श्रीमद्भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह व महारास का वर्णन

 

 

श्रीमद्भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह व महारास का वर्णन

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649

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कामां डीग जिले के कस्वा कामां कामवन धाम स्थित तीर्थराज विमल कुंड पर हो रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन की कथा प्रारंभ करते हुए कथावक्ता रामकुमार व्यास ने भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया उसे ही परास्त होना पड़ा है रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है गोपी गीत पर बोलते हुए व्यास ने कहा जब तब जीव में अभिमान आता है भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के दौरान अनेकों भजन प्रस्तुत किए गये। कथा में महन्त मोहनदास ,राधामाधव दास ,प्राण गोविन्द व
नन्दकिशोर दास व कथा व्यास का स्वागत व सम्मान मुरलीमनोहर कांवरिया क़े महन्त श्याम बाबा ने उपन्ना ओढ़ाकर किया। भागवत कथा में गोपाल दास ,राधाकृष्ण दास , ,सेवायत संजय लवानिया ,विक्रम लवानिया, सागर ,साकेत ,आशीष लवानिया ,गोपाल शास्त्री ,पिंकी शर्मा ,मीनाकुमारी ,गोपाल प्यारे ,अशोक शर्मा ,श्याम सहित सैकड़ों साधुजन व भक्तजन मौजूद रहे ॥

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