
हुसैनाबाद में बिना अधिकारिक घोषणा के बैठक में भाग लेते संसद –विधायक प्रतिनिधि!
लोकतंत्र की मूल आत्मा पारदर्शिता और जवाबदेही है , लेकिन हुसैनाबाद प्रखंड की तस्वीर इन आदर्शों से बिल्कुल उलट दिखाई देती हैं |यहां संसद और विधायक प्रतिनिधि बिना किसी आधिकारिक घोषणा के बीडीसी बैठकों में भाग लेते हैं |वहीं इन बैठकों की सूचना मीडिया तक नहीं पहुंचाई जाती , जिसके कारण जनता उन चर्चाओं से वंचित रह जाती हैं , जो मूल रूप से उनके ही हितों से जुड़ी होती हैं |
पलामू संसदीय क्षेत्र से संसद विष्णु दयाल राम लगातार तीसरी बार (2014, 2019 और 2024) निर्वाचित हुए हैं लेकिन अब तक प्रखंड स्तर पर उनके प्रतिनिधि की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है | इसी तरह , हुसैनाबाद विधानसभा से निर्वाचित विधायक संजय कुमार सिंह यादव को एक साल से अधिक का कार्यकाल पूरा हो गया , फिर भी उनके प्रतिनिधि की औपचारिक नियुक्ति की जानकारी जनता तक नहीं दी गई |इसके बावजूद , दोनों जनप्रतिनिधियों के ‘अनौपचारिक प्रतिनिधि ’लगातार बीडीसी बैठकों में बैठकर फैसलों में भागीदारी करते हैं | कई बार तो एक ही जनप्रतिनिधि के दो –दो प्रतिनिधि बैठक में मौजूद रहते हैं |
प्रखंड में हर माह बीडीसी बैठक बुलाई जाती हैं , जिसमें विकास योजनाओं और जनहित के कार्यों की समीक्षा की जाती हैं | लेकिन इन बैठकों में मीडिया को बुलाना , अधिकारियों को जरूरी नहीं लगता | इससे जनहित के निर्णय और चर्चाएं जनता तक नहीं पहुंच पाती |मीडिया को दूर रखकर अधिकारियों और अनधिकृत प्रतिनिधियों की मिलीभगत का रास्ता और आसान हो जाता हैं |
माना जाता हैं कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन हुसैनाबाद में यह परिभाषा सिर्फ किताबों और भाषणों तक सीमित रह गई हैं | यहां की स्थिति को देखकर लगता है मानो ‘अपनी डफली ’ ‘अपना राग ’ की कहावत चरितार्थ हो रही हो | जनप्रतिनिधि और नौकरशाह दोनों ही जनता के भरोसे से उपजे लोकतंत्र की बुनियादी भावना को नजरअंदाज कर रहे हैं |नतीजतन , जनता अपने ही अधिकार और फैसलों से अनजान बनी रहती है |सवाल उठते हैं कि आखिर बिना अधिकारिक घोषणा के किसी प्रतिनिधि को बैठकों में शामिल होने का अधिकार कैसे ?? मीडिया को दूर रखने का मकसद क्या है ?? और जब लोकतंत्र ‘जनता के लिए ’ ‘जनता के द्वारा ’और ‘जनता का हैं ’तो जनता तक सच्चाई क्यों नहीं पहुंचाई जाती ?? हुसैनाबाद प्रखंड की यह स्थिति लोकतंत्र के उस आदर्श पर सवाल उठाती हैं जो जनता को केंद्र में रखकर शासन चलाने की बात करता है |अब जरूरत है कि सांसद, विधायक और प्रखंड प्रशासन इस अनियमितता पर रोक लगाए और जनता को उसकी जानकारी पाने का अधिकार दिलाए |