
कटनी नगर निगम का 41 लाख का “हरा-भरा गड़बड़झाला”!
बारिश बीत गई… अब पौधरोपण का टेंडर – जनता के पैसों से ठेकेदारों की जेब होगी हरी
महापौर प्रीति संजीव सूरी और निगम आयुक्त निलेश दुबे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कटनी।
शहर के जिम्मेदार पदों पर बैठे महापौर प्रीति संजीव सूरी और निगम आयुक्त निलेश दुबे शायद उस पुरानी कहावत “वर्षा जब कृषि सुहानी” को भूल गए हैं। तभी तो जब बरसात का मौसम खत्म होने को है, तब नगर निगम ने 41 लाख रुपये का पौधरोपण टेंडर जारी कर दिया। सवाल उठता है कि जब पौधे लगाने का सबसे सही समय बरसात है, तो यह टेंडर अब क्यों निकाला गया? क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई को ठेकेदारों की जेब में डालने का खेल नहीं?
“41 लाख का खेल”
निगम की शर्तों के मुताबिक ठेकेदार को शहरभर में पौधरोपण करना होगा, जिसके लिए 120 दिन का समय तय किया गया है। लेकिन टेंडर की प्रक्रिया में ही 2-3 महीने निकल जाएंगे। तब तक सर्दी दस्तक दे चुकी होगी और पौधरोपण का कोई औचित्य नहीं बचेगा।
जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी
विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात में लगाए गए पौधे ही पनपते हैं। सर्दी और गर्मी में पौधे लगाने पर उनके जीवित रहने की संभावना नगण्य होती है। यानी करोड़ों खर्च करने के बाद भी पौधे सूख जाएंगे और जनता का पैसा डूब जाएगा।
“शुभ-लाभ” का असली खेल ?
सूत्रों का दावा है कि टेंडर में हुई यह देरी महज़ लापरवाही नहीं बल्कि एक सुनियोजित “शुभ-लाभ” का खेल है। महापौर और आयुक्त की चुप्पी इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाती है। सवाल यह है कि क्या दोनों अधिकारी इस घोटाले से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर अनजान बने हुए हैं?
पिछले साल का हश्र
पिछले साल भी निगम ने लाखों रुपये खर्च कर पौधरोपण कराया था। लेकिन अधिकांश पौधे सूख गए या देखरेख के अभाव में नष्ट हो गए। इसके बावजूद इस साल फिर वही गलती दोहराई जा रही है।
* क्या पौधरोपण जनता की भलाई के लिए है या ठेकेदारों की जेब भरने के लिए?
* क्यों हर बार बरसात खत्म होने के बाद ही टेंडर निकाला जाता है?
* क्या महापौर प्रीति संजीव सूरी और आयुक्त निलेशदुबे को यह मालूम नहीं। या जानबूझकर ये किया जा रहा। विपक्ष चुप क्यो है? उसका हित भी शामिल है क्या ?