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सत्य परेशान हो सकता है परंतु पराजित नहीं।

बादलों के द्वारा आच्छादित हुआ सूर्य कुछ समय के लिए हमारी नजरों से ओझल हो सकता है परंतु वह कभी नष्ट नहीं हो सकता है। समय बीतते बादलों को    चीरकर वह फिर से एक मधुर सी मुस्कान लिए हमारे समक्ष उपस्थित हो सकता है। पूर्ववत प्रकाश और ताप देने के कार्य में जुट जाता है। बादलों और सूर्य का लुका छुपी का यह खेल कुछ समय के लिए तो खेला जा सकता है किंतु सदा के लिए कदापि नहीं खेला जा सकता है।

जो सत्य पर अड़ा रहता है उसका साथी बनाकर परमात्मा सदा उसके साथ खड़ा रहता है। दुनिया में इस सत्य को कोई मनुष्य पराजित नहीं कर सकता। इसलिए इसे अपराजेय कहते हैं। अंततः सत्य वाजी जीतकर विजई रहता है। कोई उसके पैरों की बेड़ी नहीं बन सकता।

एक समय ऐसा भी आता है जब सत्य अपने  प्रतिद्वंद्वी असत्य के सारे दावो और कसमो को झुठलाता हुआ सबके सामने शांत भाव से आकर खड़ा हो जाता है। सत्य किसी भी समय झुक नहीं सकता। न ही वह अपनी गर्दन कदापि झुका सकता है।

सत्य से भागना या घबराना नहीं चाहिए बल्कि कैसी भी परिस्थिति क्यों न आ जाए हमें सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए। गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं- “सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं”। अंत में जीत सत्य की ही होती है।

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हमारे देश का आदर्श वाक्य भी यही है – सत्यमेव जयते यानी सत्य की ही विजय होती है। सत्य उस दौलत के समान होता है जिसे पहले खर्च करो और बाद में उसका जीवन भर आनंद प्राप्त करो। जबकि झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख तो मिलता है लेकिन उसका कर्ज जिंदगी भर चुकाना पड़ता है।

 

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