

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ़ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा हमीरपुर। बुण्देली धरती के महोबा और हमीरपुर जिले में विरमा नदी पर बने मौदहा बांध को पर्यटक स्थल के रूप में चमकाने की महत्वाकांक्षी योजना दो साल से ठप पड़ी है। 15 करोड़ 48 लाख रुपये की इस परियोजना को शासन ने मंजूरी तो दे दी, लेकिन सिंचाई विभाग से एनओसी न मिलने के कारण चार करोड़ से अधिक धनराशि वापस हो चुकी है।अब पर्यटन विभाग राजस्व की जमीन चिह्नित कर नया प्राक्कलन तैयार करने की तैयारी में है।बांध की विशेषताएं मौदहा बांध 3.48 किलोमीटर लंबा और 22 मीटर ऊंचा है, जिसकी जल क्षमता 200 मिलियन क्यूसिक मीटर है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मात्र चार किलोमीटर दूर स्थित यह बांध हमीरपुर व महोबा के कई गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करता है।बांध के बीच एक द्वीप होने से प्राकृतिक सौंदर्य लुभावना है, जहां पहले से ही पर्यटक नौका विहार का आनंद लेते हैं प्रस्तावित सुविधाएंयोजना में इको-पार्क, म्यूजिकल फाउंटेन, वॉच टावर, एडवेंचर स्पोर्ट्स, कैफेटेरिया, मोटर बोट, हाईमास्ट झंडा, हर्बल गार्डन और स्वामी ब्रह्मानंद की 40 लाख रुपये की मूर्ति शामिल है।विशेष कोटेज बनाकर पर्यटकों को बांध का नजारा कमरों से ही उपलब्ध कराया जाएगा। सिंचाई विभाग को मछली पालन से होने वाली आय के अलावा पर्यटन से नई कमाई की उम्मीद है
अटकने का कारण2023 में शासन की मंजूरी के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो सका
जानकारी के अनुसार, सिंचाई विभाग की ओर से एनओसी न देने से धन लौट गया। अब बांध क्षेत्र से हटकर राजस्व भूमि पर प्रोजेक्ट करने का प्रयास हो रहा है। हालिया समाचारों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट की योजना भी सामने आई है, जो पर्यटकों को अतिरिक्त आकर्षण देगी।जिला प्रशासन से संपर्क करने पर स्पष्ट निर्देश की प्रतीक्षा है।
