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हमीरपुर :जीवन जीना रामायण से और मरना भागवत गीता से सीखो —राधिका द्विवेदी 

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट

मौदहा हमीरपुर। क्षेत्र के ग्राम करहिया स्थित महेश्वरी देवी मन्दिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को बृन्दावन से पधारी कथा व्यास राधिका द्विवेदी ने कहा कि जीवन जीना सीखना है तो श्री रामायण से सीखो और मरना सीखना है तो भागवत गीता से सीखो। त्रिवेणी संगम में गंगा, जमुना, सरस्वती का मिलन होता है। मिलन में गंगा जमुना तो दिखाई देती हैं लेकिन सरस्वती को कोई नहीं देख पाता, सरस्वती को देखने के लिए कई बार प्रयास करने पड़ते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती। इसी तरह गीता में विज्ञान, वैराग्य और भक्ति है, लेकिन विज्ञान और वैराग्य तो दिखाई देता है लेकिन भक्ति नहीं दिखाई देती, भक्ति को देखने के लिए लीन होना पड़ता है। इसके अलावा व्यास नारद संवाद परीक्षित जन्म वक्ता के दस लक्षण, रसिका भूवि भाविका, कुंती चरित्र, विदुर मैत्री प्रसंग की कथा श्रवण कराई। इस मौके पर परीक्षित बने बिन्दी देवी व सुक्खी प्रजापति सहित गाँव के बच्चा, बतासवा ,पप्पू,डॉ मुन्नीलाल, बच्चू ,रामप्रसाद, कल्लू, पिन्टू, हीरालाल, लल्लू, राजू, सहित सैकड़ों श्रोताओं ने कथा का आनन्द लिया।

 

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