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कुछ घंटों में 3 गुना तक बढ़ जाते हैं हवाई किराए

अधिवक्ता सम्यक जैन ने प्रधान मंत्री को लिखा पत्र,DGCA के जवाब पर उठे सवाल

           DGCA के जवाब पर उठे सवाल

नई दिल्ली/ भोपाल। देश में हवाई किरायों में हो रहे तेज और अनिश्चित उतार-चढ़ाव को लेकर अब जनहित का मुद्दा उभरता जा रहा है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सम्यक जैन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।अपने पत्र में जैन ने कहा है कि एक ही रूट पर हवाई टिकट के दाम कुछ ही घंटों में 2 से 3 गुना तक बढ़ जाते हैं। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और मेडिकल इमरजेंसी के समय यह स्थिति आम लोगों के लिए बेहद कठिन हो जाती है।इस पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के उप महानिदेशक अमित गुप्ता ने जवाब देते हुए कहा कि नियमों के अनुसार एयरलाइंस को किराया तय करने की स्वतंत्रता है और यह उनका अधिकार क्षेत्र है।नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार, कंपनियां अपने खर्च और बाजार की स्थिति को देखते हुए टिकट की कीमत निर्धारित करती हैं।हालांकि, इस जवाब के बाद बहस और तेज हो गई है। जैन ने कहा, कानूनी रूप से यह सही हो सकता है, लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या यह आम जनता के हित में भी है? आज हवाई यात्रा जरूरत बन चुकी है, लेकिन कीमतों की अनिश्चितता इसे आम आदमी की पहुंच से बाहर कर रही है

*इमरजेंसी में सबसे ज्यादा परेशानी*

सम्यक जैन का कहना है कि अचानक बढ़ते किराए सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर डालते हैं, जिन्हें इमरजेंसी में यात्रा करनी होती है। कई बार अंतिम समय पर टिकट की कीमत इतनी ज्यादा हो जाती है कि लोगों को यात्रा टालनी पड़ती है। रेलवे, दवाइयों और ईंधन जैसे क्षेत्रों में जहां कुछ स्तर तक सरकारी निगरानी रहती है, वहीं हवाई किरायों में पूरी तरह बाजार आधारित व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।जैन ने सुझाव दिया है कि सरकार बिना सीधे दाम तय किए भी कुछ कदम उठा सकती है, जैसे किराया तय करने में पारदर्शिता बढ़ाना, त्योहारों और आपात स्थितियों में अत्यधिक बढ़ोतरी पर नियंत्रण, एयर फ्यूल पर टैक्स में कमी, उपभोक्ता शिकायतों के समाधान को मजबूत करना

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*जनहित का बनता मुद्दा*

भारत में हवाई यात्रा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही यह चिंता भी बढ़ रही है कि क्या यह सुविधा आम लोगों के लिए किफायती बनी रह पाएगी।जैन ने कहा, अगर यही स्थिति रही, तो हवाई यात्रा धीरे-धीरे सिर्फ उन लोगों तक सीमित हो जाएगी, जो अनिश्चित और महंगे किराए वहन कर सकते हैं। हवाई किरायों का यह मुद्दा अब आम जनता से जुड़ा विषय बनता जा रहा है, जिस पर सरकार और नियामक संस्थाओं की भूमिका अहम मानी जा रही है।

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