
पांढुर्णा में “पोषण क्लिनिक” अभियान को मिली रफ्तार, कुपोषित बच्चों की पहचान, जांच और उपचार पर प्रशासन का फोकस
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
जिला कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देशन में जिलेभर में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण के प्रभावी प्रबंधन हेतु “पोषण क्लिनिक” अभियान को गति दी गई है। इस पहल के अंतर्गत सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से कुपोषित बच्चों की पहचान, जांच और उपचार की समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

अभियान के तहत मैदानी अमले द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों से चिन्हित बच्चों को संबंधित आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर लाकर मेडिकल ऑफिसर, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) एवं एएनएम द्वारा विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार बच्चों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं, वहीं जिन बच्चों में जटिलताएं पाई गईं, उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत रेफर किया गया।

विकासखंड पांढुर्णा में इस अभियान के तहत कुल 29 संस्थाओं में पोषण क्लिनिक आयोजित किए गए। पोषण ट्रैकर के अनुसार 109 SAM (गंभीर कुपोषित) बच्चों की जांच प्रस्तावित थी, जिनमें से 57 बच्चों की जांच की गई। वहीं 220 MAM (मध्यम कुपोषित) बच्चों में से 194 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

पोषण क्लिनिक के दौरान 30 गंभीर कुपोषित बच्चों को NRC में भर्ती के लिए रेफर किया गया, जबकि 36 बच्चों को RBSK के तहत आगे की जांच हेतु भेजा गया। साथ ही 271 बच्चों को आवश्यक दवाइयां प्रदान कर उनके स्वास्थ्य सुधार के प्रयास किए गए।
इसके अतिरिक्त, ऐसे कुपोषित बच्चों के लिए, जिनका उपचार समुदाय स्तर पर संभव है, 12 सप्ताह तक सतत फॉलो-अप एवं निगरानी की व्यवस्था की गई है। इस दौरान स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के कार्यकर्ता नियमित रूप से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हेतु मार्गदर्शन देंगे।
अभियान की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर निरंतर मॉनिटरिंग एवं मासिक समीक्षा की जा रही है। यह पहल जिले में कुपोषण उन्मूलन और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।