
बानसूर। क्षेत्र के एक निजी स्कूल में शिक्षक की दरिंदगी का खौफनाक मामला सामने आया है। आरोप है कि शिक्षक ने कक्षा-7 के एक छात्र को प्रार्थना सभा में सबके सामने इतनी बेरहमी से पीटा कि मासूम के दाहिने हाथ से खून बहने लगा और शरीर पर 15-20 जगह चोट के निशान उभर आए।
पीड़ित छात्र की मां ने बानसूर थाने में दी तहरीर में बताया कि 24 अप्रैल 2026 को सुबह 9:30 बजे मॉर्निंग असेंबली के दौरान ने उनके बेटे को सबके सामने बुलाकर डंडे से पीटना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने पूछा कि उसे क्यों मारा जा रहा है, तो शिक्षक ने धमकाते हुए कहा- “पहले पिट, बाद में बताऊंगा।”

एफआईआर के अनुसार मारपीट के दौरान छात्र के दाहिने हाथ में गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा, फिर भी शिक्षक नहीं रुका। यहां तक कि जब छात्र दर्द से जमीन पर गिर गया, तब भी उसे लगातार पीटा गया। बच्चे के हाथ, कमर, हिप्स और पैर में अंदरूनी दर्द है। शरीर पर 15-20 चोटों के निशान हैं। मां का आरोप है कि सुबह 9:30 बजे की घटना के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने दोपहर 1:30 बजे फोन कर सूचना दी। जब परिजन स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने 10-15 मिनट का बहाना बनाकर उन्हें बार-बार टालते हुए समय बर्बाद किया। आरोप है कि जब परिजन पुलिस में शिकायत करने लगे तो प्रिंसिपल घर आकर इमोशनल दबाव बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराने से रोकने लगीं और शिक्षक का ही पक्ष लेती रहीं। छात्र के पिता के साथ भी असभ्य व्यवहार किया गया।

परिजनों के अनुसार आरोपी शिक्षक ने धमकी दी कि “पुलिस केस कर लो, उससे क्या होगा।” शिक्षक ने न तो जिम्मेदारी ली और न ही मामले को गंभीरता से लिया। बच्चा घटना के बाद से डरा-सहमा है और स्कूल जाने से इनकार कर रहा है। तहरीर में खुलासा हुआ है कि सत्र 2021-22 में भी इसी स्कूल में ही छात्र की बड़ी बहन को भी एक शिक्षक ने टेबल पर पटककर मारा था। लगातार दूसरी बार परिवार के बच्चे के साथ मारपीट से परिजन दहशत में हैं।
छात्र की माँ ने संदेह जताते हुए बताया कि स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद प्रबंधन फुटेज उपलब्ध नहीं करा रहा। साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया जा सकता है। प्रिंसिपल पर भी शिक्षक को बचाने और शिकायत दबाने का आरोप है।बानसूर पुलिस ने शिक्षक व स्कूल प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।
क्षेत्र के स्कूल में बार-बार मारपीट की घटनाओं के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने शिक्षा विभाग से स्कूल की मान्यता रद्द करने और दोषी शिक्षक को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। आरटीई एक्ट में स्कूलों में शारीरिक दंड पूरी तरह प्रतिबंधित है।
