
पांढुर्णा में NABL मान्यता प्राप्त पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रकाश भाऊ ऊईके की पहल सफल
भोपाल में PHE मंत्री से मुलाकात के बाद प्रस्ताव को मिली सकारात्मक सहमति
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना – नवगठित पांढुर्णा जिले में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सफल होती नजर आ रही है। पूर्व जिला न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), नई दिल्ली के सलाहकार श्री प्रकाश भाऊ उइके के प्रयासों से जिले में NABL मान्यता प्राप्त पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित किए जाने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
श्री प्रकाश भाऊ उइके ने भोपाल में मध्यप्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री संपतिया ऊईके से मुलाकात कर पांढुर्णा जिले में जिला/डिवीजन स्तर की NABL मान्यता प्राप्त पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इस विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद मंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक सहमति जताते हुए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

मुलाकात के दौरान श्री उइके ने बताया कि नवगठित पांढुर्णा जिले में लगभग 287 ग्राम और 386 बसाहटें हैं, जहाँ बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति समुदाय निवास करता है। जिले में वर्तमान में करीब 1627 हैंडपंप और 252 ग्रामीण नल-जल योजनाएँ संचालित हैं, जिनके माध्यम से पांढुर्णा, सौंसर और उप-तहसील नंदनवाड़ी के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पेयजल योजनाएँ संचालित होने के बावजूद जिले में अभी तक NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) से मान्यता प्राप्त कोई भी पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला उपलब्ध नहीं है। इसके अभाव में पानी की गुणवत्ता का नियमित और प्रमाणित परीक्षण कर पाना कठिन हो जाता है।
श्री उइके ने इस विषय को आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल के अधिकार से जोड़ते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताया तथा जल्द से जल्द प्रयोगशाला स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि पांढुर्णा जिले में NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला स्थापित होने से पेयजल की वैज्ञानिक एवं प्रमाणित जांच संभव होगी। साथ ही फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक और बैक्टीरिया जैसे हानिकारक तत्वों की समय रहते पहचान हो सकेगी। इससे जल जीवन मिशन और ग्रामीण नल-जल योजनाओं की गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर पानी की जांच की सुविधा मिलने से समय और संसाधनों की बचत होगी तथा किसी भी जल स्रोत में समस्या पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। इससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से भी अधिक विश्वसनीय मानी जाती है।
श्री प्रकाश भाऊ उइके ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक सहमति देने के लिए मंत्री संपतिया ऊईके का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही पांढुर्णा जिले में NABL मान्यता प्राप्त पेयजल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी, जिससे जिले के नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।