सीएमओ के औचक निरीक्षण के बाद भी सवाल बरकरार, क्या सुधरेंगी अस्पतालों की व्यवस्थाएं या फिर सिर्फ निर्देशों तक रहेगा असर?
महेवा और नियामतपुर में सीएमओ-एसीएमओ ने मारा छापा, दवाओं की उपलब्धता से लेकर सफाई और टीकाकरण तक दिए निर्देश
कालपी (जालौन) रविवार को कालपी क्षेत्र के पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयोजित मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेलों में कुल 152 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं दोपहर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि नन्दन प्रसाद और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी वर्मा ने महेवा तथा नियामतपुर चिकित्सालयों का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत परखी।
औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने चिकित्सकों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पतालों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, मरीजों को समय से उपचार मिले, टीकाकरण अभियान में तेजी लाई जाए और अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए।
महेवा में चिकित्साधिकारी डॉ. शेख शहरयार समेत कर्मचारियों को विशेष रूप से दवाओं की उपलब्धता और मरीजों के समय से उपचार को लेकर निर्देशित किया गया। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन निर्देशों का जमीन पर असर दिखाई देगा या फिर औचक निरीक्षण के बाद व्यवस्था दोबारा पुराने ढर्रे पर लौट जाएगी?
पांच केंद्रों पर 152 मरीजों का उपचार
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उदनपुरा कालपी में चिकित्साधिकारी डॉ. अमित पोरवाल की अध्यक्षता में आयोजित आरोग्य मेले में 52 मरीजों का उपचार हुआ। इनमें 31 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल रहीं। सात मरीजों की शुगर जांच की गई, जबकि बुखार और त्वचा संबंधी बीमारी के छह-छह मरीजों की जांच हुई।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महेवा में 26, बावई में 28, चुरखी में 21 और नियामतपुर में 25 मरीजों का उपचार किया गया। इस दौरान मरीजों को आवश्यक दवाएं एवं स्वास्थ्य संबंधी सामग्री वितरित की गई तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम के प्रति जागरूक किया गया।
अब असली परीक्षा कार्रवाई की
निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्थाओं में सुधार का संकेत जरूर दिया है, लेकिन असली परीक्षा अब इन निर्देशों के पालन की है। अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं, समय पर इलाज, नियमित टीकाकरण और साफ-सफाई की व्यवस्था कितनी सुधरती है, यह मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से ही सामने आएगा।
जिला संवाददाता
गायत्री निषाद की कलम से

