

हमीरपुर से ब्यूरो चीफ राजकुमार की रिपोर्ट
मौदहा हमीरपुर।रमज़ान-उल-मुबारक (Ramadan) इस्लामी कैलेंडर का पवित्र नौवां महीना है, जिसे ‘नेकियों का मौसम’ या इबादत का सुनहरा अवसर माना जाता है। इसमें रोजा (उपवास), तरावीह की नमाज, कुरान की तिलावत और दान (सदाकत-उल-फितर) के जरिए खुदा की रहमत और बरकतें हासिल की जाती हैं। यह आत्म-अनुशासन, सब्र और रूहानी सफाई का समय है।
नेकियों में बढ़ोतरी: इस महीने में हर छोटी-बड़ी नेकी का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है।
लाइलतुल-कद्र (शब-ए-कद्र): रमज़ान की आखिरी 10 रातों में से किसी एक ताक रात (Odd Night) में ‘लाइलतुल-कद्र’ होती है, जो ‘हजार महीनों से बेहतर’ है।
कुरान का महीना: इसी महीने में कुरान शरीफ नाजिल हुआ था, इसलिए इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
दान और फितरा: गरीबों की मदद करना और ‘फितरा’ देना जरूरी है, जो रमज़ान की खुशी में उन्हें शामिल करता है।
तरावीह: इशा की नमाज के बाद विशेष नमाज, तरावीह, पढ़ी जाती है जिसमें पूरा कुरान सुनाया जाता है।
रोजा और इफ्तार: भूखे-प्यासे रहकर रोजा रखने से संयम आता है, और ‘इफ्तार’ (रोजा खोलना) के समय की दुआएं बहुत कीमती होती हैं।
यह पवित्र महीना आत्म-सुधार और अल्लाह के करीब आने का सबसे बड़ा मौका है।