
IAS संतोष वर्मा को बड़ा झटका: MG रोड थाने में देना होंगे सिग्नेचर सैंपल
राहुल सेन मांडव
मो 9669141814
इंदौर न्यूज/इंदौर की अदालत ने IAS संतोष वर्मा के लिए एक नया आदेश जारी किया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज़ मामले में सुनवाई करते हुए उन्हें इंदौर के MG रोड पुलिस थाने में हस्ताक्षर के नमूने देने का आदेश दिया है। इस कदम के बाद आईएएस वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अब पुलिस जांच में उनका सक्रिय सहयोग अनिवार्य हो गया है।
संतोष वर्मा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिकारी कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनके खिलाफ यह मामला काफी समय से अदालतों और पुलिस जांच के दायरे में है।
जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
अपर लोक अभियोजक योगेश जायसवाल के अनुसार, MG रोड पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान आईएएस वर्मा को हस्ताक्षर के नमूने देने के लिए बुलाया गया था। लेकिन उन्होंने लंबे समय तक जांच को टालते हुए सहयोग नहीं किया। इसके कारण पुलिस की जांच प्रक्रिया रुक गई और मामले की प्रगति बाधित हुई।
बार-बार बुलाने के बावजूद अगर किसी आरोपी द्वारा सहयोग नहीं किया जाता है, तो पुलिस के लिए अदालत में कार्रवाई करना अनिवार्य हो जाता है। यही स्थिति इस मामले में सामने आई।
पुलिस ने जमानत रद्द करने के लिए कोर्ट में आवेदन किया
जाँच में सहयोग नहीं करने के बाद पुलिस ने अदालत में आवेदन देकर आईएएस संतोष वर्मा की जमानत रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि वर्मा को जांच में सहयोग करना होगा। इस आदेश के अनुसार, संतोष वर्मा को MG रोड थाने में जाकर सिग्नेचर सैंपल देना होगा।
पुलिस का मानना है कि हस्ताक्षर के नमूने लेने के बिना जांच में तेजी लाना मुश्किल है। इसलिए अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का पालन करना आवश्यक है।
आईएएस वर्मा के वकील का पक्ष
संतोष वर्मा के वकील ने आरोपों का खंडन किया और दावा किया कि उनके मुवक्किल को फंसाने की साजिश रची जा रही है। वकील ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी के समय पहले ही हस्ताक्षर लिए जा चुके हैं, इसलिए बार-बार बुलाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुराने हस्ताक्षर की जांच लंबी प्रक्रिया में है, लेकिन तुरंत नए सिग्नेचर सैंपल की आवश्यकता इसलिए पड़ी है ताकि जांच आगे बढ़ सके।
कोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि संतोष वर्मा द्वारा हस्ताक्षर के नमूने देने के बाद ही जमानत रद्द करने के आवेदन पर निर्णय लिया जाएगा।
इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 4 मार्च 2026 तय की गई है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि जांच में सहयोग न करने पर आगे और कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
पुराने दस्तावेज़ और लंबी जांच प्रक्रिया
अपर लोक अभियोजक ने बताया कि पुराने हस्ताक्षर के दस्तावेज अभी हाईकोर्ट की जांच प्रक्रिया में हैं। इन दस्तावेज़ों की जांच में लंबा समय लग सकता है। वहीं, तुरंत सिग्नेचर सैंपल लेने से जांच में तेजी आएगी और दोषियों की पहचान जल्द हो सकेगी।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर और दस्तावेज़ की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
IAS संतोष वर्मा की स्थिति
इस आदेश के बाद संतोष वर्मा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उन्हें MG रोड पुलिस थाने में जाकर सिग्नेचर सैंपल देना होगा, अन्यथा अदालत कठोर कदम उठा सकती है।
उनके खिलाफ पहले से ही फर्जी दस्तावेज और कूटरचित दस्तावेज़ का मामला दर्ज है। अब यह आदेश जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मामले का महत्व
यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है। यह सरकारी दस्तावेज़ और प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की अहमियत को भी सामने लाता है।
आईएएस अधिकारी जैसे उच्च पदस्थ व्यक्ति के हस्ताक्षर और दस्तावेज़ की जांच न होना, सार्वजनिक विश्वास पर भी सवाल उठाता है। अदालत के इस आदेश से यह संदेश जाता है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे व्यक्ति कितनी भी उच्च पद पर क्यों न हो।
निष्कर्ष
IAS संतोष वर्मा को MG रोड थाने में हस्ताक्षर के नमूने देने का आदेश उनके लिए बड़ा झटका है। अदालत ने साफ निर्देश दिए हैं कि जांच में सहयोग करना अनिवार्य है।
अब देखने वाली बात यह है कि वे आदेश का पालन करेंगे या फिर अदालत के सामने और जटिल परिस्थितियां आएंगी।
इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च 2026 को होगी, और तब अदालत इस बात का निर्णय लेगी कि जमानत बरकरार रहेगी या रद्द हो जाएगी।
मुख्य बिंदु:
फर्जी दस्तावेज़ और कूटरचित दस्तावेज़ का मामला
MG रोड पुलिस थाने में सिग्नेचर सैंपल देने का आदेश
जमानत रद्द करने का आवेदन
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सैंपल देने के बाद ही जमानत पर फैसला होगा
अगली सुनवाई 4 मार्च 2026 को