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प्राकृतिक_खेती से महिला किसानों को मिली प्रदेश स्तर पर पहचान

MANAN 2026 फोरम में पांढुर्णा जिले की महिला किसानों के कार्य की सराहना

प्राकृतिक_खेती से महिला किसानों को मिली प्रदेश स्तर पर पहचान

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

MANAN 2026 फोरम में पांढुर्णा जिले की महिला किसानों के कार्य की सराहना

संवाददाता: धनंजय जोशी
जिला पांढुर्णा | मध्यप्रदेश
पांढुरना – पांढुर्णा जिले की महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए प्रदेश स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले की महिला कृषक मीता धुर्वे एवं कविता सिरसाम ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल खेती की लागत कम की, बल्कि रसायन मुक्त उत्पादन कर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनीं।

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इन दोनों महिला किसानों के कार्यों की सराहना भोपाल में आयोजित “MANAN 2026” फोरम में की गई, जहां प्रदेशभर से आए कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों, विभागीय अधिकारियों एवं हितधारकों के बीच पांढुर्णा जिले की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
भोपाल में हुआ MANAN 2026 फोरम का आयोजन
भोपाल में आयोजित MANAN 2026 फोरम जलवायु-सहिष्णु कृषि (Climate Resilient Agriculture) को लेकर प्रदेश स्तर का महत्वपूर्ण मंच रहा। इस कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग के अंतर्गत किया गया, जिसमें कृषि सचिव श्री निशांत वरवड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश के लगभग 150 हितधारकों ने भाग लिया।
फोरम में जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर पड़ने वाले प्रभाव, प्राकृतिक खेती की उपयोगिता, जैविक उत्पादन की बाजार संभावनाएं, महिला किसानों की भागीदारी तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।


महिला किसानों ने साझा किए अपने अनुभव
MANAN 2026 फोरम के दौरान पांढुर्णा जिले की महिला किसान मीता धुर्वे और कविता सिरसाम को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बंद कर गोबर खाद, जीवामृत, घनजीवामृत, नीम आधारित जैविक घोल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से खेती की शुरुआत की।
उनके द्वारा उत्पादित अनाज एवं सब्जियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और बाजार में मांग बढ़ने से आय में भी वृद्धि देखी गई।
जैविक उत्पाद केंद्र में किया उल्लेखनीय कार्य
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि मीता धुर्वे और कविता सिरसाम ने जैविक उत्पाद केंद्र के माध्यम से प्राकृतिक खेती के उत्पादों को व्यवस्थित रूप से तैयार कर बाजार तक पहुंचाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है।
उनके प्रयासों से आसपास के गांवों की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हुईं और अब कई महिलाएं प्राकृतिक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


  1. जलवायु-सहिष्णु कृषि पर केंद्रित रही चर्चा
    फोरम में विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में मौसम में अनिश्चितता, तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और सूखे की स्थिति किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती जैसी पद्धतियां जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
    कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, विपणन व्यवस्था और महिला समूहों को सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया।
    पांढुर्णा जिले को मिली नई पहचान
    MANAN 2026 जैसे प्रतिष्ठित मंच पर पांढुर्णा जिले की महिला किसानों का चयन होना जिले के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पांढुर्णा जिले की महिलाएं खेती में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
    महिला किसानों की इस उपलब्धि से जिले में प्राकृतिक खेती अभियान को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
    प्रेरणादायी बनी मीता धुर्वे और कविता सिरसाम
    मीता धुर्वे और कविता सिरसाम ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और मेहनत मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उनका यह प्रयास आने वाली पीढ़ी के किसानों और महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।

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