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नववर्ष 2026 में माँ नर्मदा को प्रदूषण से मुक्ति की दिशा में बड़ी पहल

नववर्ष 2026 में माँ नर्मदा को प्रदूषण से मुक्ति की दिशा में बड़ी पहल

 

प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालयी सख्ती के बाद डिण्डौरी में गंदे नालों पर लगेगा अंकुश

डिण्डौरी।नववर्ष 2026 के साथ ही माँ नर्मदा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने की दिशा में डिण्डौरी जिले में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कदम उठाया गया है। नगर क्षेत्र से नर्मदा नदी में सीधे मिल रहे गंदे नालों को रोकने के लिए शासन ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से परियोजना स्वीकृत की है। इस परियोजना की जानकारी गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने दी।

कलेक्टर ने बताया कि नर्मदा के उद्गम पश्चात प्रथम प्रवेश नगर डिण्डौरी में नगरीय क्षेत्र से निकलने वाले गंदे नालों को रोकने को लेकर श्रद्धालुओं, नर्मदा परिक्रमावासियों, जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों में लंबे समय से रोष और चिंता थी। इस गंभीर समस्या को लगातार आयुक्त नगरीय प्रशासन, प्रमुख अभियंता एमपीयूडीसी तथा अपर मुख्य सचिव स्तर तक अवगत कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप अब यह ठोस पहल सामने आई है।

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स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत माँ नर्मदा के बाएँ तट से मिलने वाले कुल 07 गंदे नालों—चन्द्रविजय कॉलेज, ईमलीकुटी, रेहली मोहल्ला, गायत्री मंदिर, नर्मदा पुल, नर्मदा पुल एवं मंदिर के मध्य स्थित नाला तथा श्मशान घाट के पास स्थित नाला—को रोका जाएगा। नालों पर रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा तथा चन्द्रविजय कॉलेज और श्मशान घाट के पास लिफ्टिंग पम्पिंग स्टेशन स्थापित कर नालों के पानी को सीवर लाइन से जोड़ते हुए आरटीओ कार्यालय के पास स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा। उपचारित जल का उपयोग खेती एवं अन्य व्यावसायिक कार्यों में किया जाएगा।

इस बीच उल्लेखनीय है कि नर्मदा नदी में गंदे नालों के सीधे प्रवाह को लेकर डिण्डौरी जिला व्यापारी संघ द्वारा जन उपयोगी लोक अदालत में याचिका दायर की गई थी, जिस पर न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव सहित नगरीय प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। याचिका में नर्मदा में मिल रहे नाले, सीवेज प्रोजेक्ट की तकनीकी खामियों, मानक-विपरीत पतली पाइपलाइन, बार-बार सीवेज ओवरफ्लो, क्षतिग्रस्त सड़कों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अपूर्ण संचालन को गंभीरता से उठाया गया था।

इस जनहित याचिका की प्रभावी पैरवी अधिवक्ता सम्यक जैन एवं के.के. सोनी द्वारा की गई थी, जिसमें नर्मदा नदी की पवित्रता, स्वच्छ पेयजल और नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों को मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा गया था। न्यायालयी हस्तक्षेप के बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी उच्च प्राथमिकता में आया, जिसके परिणामस्वरूप अब यह परियोजना धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है।

परियोजना के अंतर्गत कार्य एजेंसी मेसर्स जे.एम. रमानी एण्ड कम्पनी द्वारा नववर्ष के प्रारंभ से कार्य शुरू कर दिया गया है। आवश्यक मशीनें स्थल पर पहुँच चुकी हैं और परियोजना को तीन माह में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। नर्मदा जयंती से पूर्व प्रथम चरण में तीन नालों को नदी में मिलने से रोकने का प्रयास किया जाएगा। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चरण में नर्मदा के दाएँ तट के लिए भी पृथक कार्ययोजना स्वीकृत कराई जाएगी।

प्रेस वार्ता में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा— माँ नर्मदा हमारे लिए आस्था और जीवन दोनों का आधार हैं। जनसहयोग से ही नगर का समग्र विकास संभव है और वर्ष 2026 में डिण्डौरी को स्वच्छ, साफ-सुथरा एवं पर्यावरण-अनुकूल नगर बनाने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

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