

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
राठ हमीरपुर। मोबियस फाउंडेशन के ज्ञान कन्या शक्ति कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के उरई मार्ग स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को डिजिटल हब के रूप में विकसित किया गया है। इसके अंतर्गत छात्राओं को ऑनलाइन क्लास के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे पारंपरिक पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीक से भी जुड़ रही हैं।
कार्यक्रम की समन्वयक नीशू बोस ने बताया कि मोबियस फाउंडेशन के ज्ञान कन्या शक्ति कार्यक्रम द्वारा चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, कौशांबी, झांसी, जालौन और ललितपुर जनपद के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को डिजिटल हब में तब्दील किया गया है। इन विद्यालयों में अब बालिकाओं की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल क्लासरूम, स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक तकनीक की मदद से की जा रही है। इससे छात्राओं की पढ़ाई आसान हुई है और उनकी रुचि व आत्मविश्वास में भी इजाफा हुआ है।
जिला समन्वयक विवेक कुमार ने बताया ज्ञान कन्या शक्ति पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत ग्रामीण बेटियों को स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सशक्त किया जा रहा है। जिन्होंने पहले पढ़ाई-लिखाई और संसाधनों से वंचित रहना पड़ता था, अब वे डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ रही हैं। वर्ष 2023 से संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में अब तक 46 आईटी क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं।
इन आईटी क्लासरूम में टीवी स्क्रीन, लैपटॉप, इनवर्टर बैकअप और अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी मदद से बालिकाओं को लाइव इंटरएक्टिव क्लासेस की सुविधा दी जा रही है। इससे शिक्षण प्रक्रिया में सुधार हुआ है और छात्राओं को नवीन शिक्षण पद्धतियों के साथ जोड़ा गया है।
कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 9 तक की छात्राओं को हर वर्ष स्टेशनरी किट भी दी जाती है, जिसमें दो रजिस्टर, 12 पेन और ज्योमेट्री बॉक्स शामिल हैं। इसके अलावा खेल सामग्री, टी-शर्ट और सेनेटरी नैपकिन जैसी आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि उनकी शैक्षिक व व्यक्तिगत जरूरतों की पूर्ति हो सके।
बोस ने बताया कि हर साल दो बार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) टीम के सहयोग से हेल्थ कैंप आयोजित किए जाते हैं। इन कैंपों के माध्यम से छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच, परामर्श और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी सुनिश्चित हो रही है।