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ग्राम पंचायत पिपरिया और काटोल में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, शासकीय भूमि से हटाया अवैध अतिक्रमण

अवैध कब्जाधारियों पर प्रशासन का शिकंजा

अवैध कब्जाधारियों पर प्रशासन का शिकंजा

ग्राम पंचायत पिपरिया और काटोल में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, शासकीय भूमि से हटाया अवैध अतिक्रमण

गौशाला और चारागाह के लिए सुरक्षित की गई भूमि


अवैध कब्जाधारियों प्रशासन का शिकंजा गौ शाला चारागाह के सुरक्षित कराई गई जमीन

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बैतूल। ग्राम पंचायत पिपरिया और काटोल की शासकीय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बैतूल अपर कलेक्टर, तहसीलदार, राजस्व विभाग और थाना प्रभारी भैंसदेही की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई की। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत काटोल और पिपरिया में की गई, शासकीय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाकर गौशाला और चारागाह के लिए सुरक्षित की गई। ग्राम पंचायत पिपरिया और काटोल की शासकीय भूमि को शासकीय पूर्णा गौशाला और अन्य पशुओं के चारागाह के लिए छोड़ने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पंचायत द्वारा पौधारोपण करने का भी फैसला किया गया है। इस कार्यवाही के लिए गौशाला समिति ने बैतूल अपर कलेक्टर, तहसील भैंसदेही और थाना प्रभारी भैंसदेही का धन्यवाद व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि गौशला समिति ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ लड़ी लंबी लड़ाई में पुलिस, एसडीएम भैंसदेही और वन विभाग को भी अपनी शिकायतें प्रेषित की थीं। पिछले 45 वर्षों से पिपरिया पंचायत के अंतर्गत आने वाली शासकीय चरनोई भूमि, पटवारी हल्का नंबर पिपरिया, खसरा नंबर 74 में लगभग 30 एकड़ जमीन पर आसपास के किसानों द्वारा अवैध अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी। यह जमीन गौशाला के समीप ही स्थित है।

— शासकीय भूमि पर की जा रही थी खेती–

दरअसल, किसानों द्वारा यहां शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती की जा रही थी। शिकायत के बाद 15 जून को गौशाला समिति और पिपरिया सरपंच ने मौके पर पहुंचकर डायल 100 को सूचना दी थी। डायल 100 की टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि अनावेदक बलदेव ट्रैक्टर चलाकर अतिक्रमण कर रहा था। पुलिस ने बलदेव का ट्रैक्टर जप्त कर लिया था, लेकिन पिपरिया पंचायत के सरपंच के कहने पर उसे छोड़ दिया गया। इसके बाद गौशाला समिति ने उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की, जिसके बाद सख्ती से कार्रवाई की गई। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई के बाद अब चरनोई की भूमि, जो पिपरिया पंचायत के अंतर्गत आती है, गौशाला और अन्य पशुओं के चारागाह के लिए सुरक्षित कर दिया गया है।

यह भूमि अब पशुओं के चारागाह के रूप में उपयोगी होगी, यहां पौधा रोपण कर इसे और भी हरित बनाया जाएगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौशाला समिति का कहना है कि इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप स्थानीय प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह के अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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